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गृहणियां बोलीं- रसोई गैस की कीमतें पहले ही आसमान पर, अब खाद्य सामग्रियों पर GST से और कटेगी जेब

पैक्ड फूड आइटम पर जीएसटी लगने से गड़बड़ाया रसोई का बजट

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गृहणियां बोलीं- रसोई गैस की कीमतें पहले ही आसमान पर, अब खाद्य सामग्रियों पर GST से और कटेगी जेब

गृहणियां बोलीं- रसोई गैस की कीमतें पहले ही आसमान पर, अब खाद्य सामग्रियों पर GST से और कटेगी जेब

इंदौर. प्री-पैक्ड गैर ब्रांडेड फूड प्रोडक्ट पर जीएसटी (GST) लगने की सीधी मार आम आदमी की जेब से होते हुए अब रसोई तक पहुंच गई है। इससे पहले तक रसोई गैस सिलेंडर की लगातार बढ़ रही कीमत ने पहले ही लोगों को परेशान कर रखा है, वहीं अब पैक्ड सामान की कीमतें बढ़ने से तड़का की रंगत और फीकी होती दिख रही है।जीएसटी काउंसिल ने पैकिंग वाले सभी फूड प्रोडक्ट को भी जीएसटी (GST) के दायरे में लिया है। इससे 25 किलो तक के उन प्रोडक्ट की कीमतें सीधे तौर पर बढ़ गईं, जो रसोई में प्रत्यक्ष रूप से इस्तेमाल होते रहे हैं। आमतौर पर ज्यादातर घरों में किसी भी तरह के फूड प्रोडक्ट 25 किलो से कम मात्रा में ही खरीदे जाते हैं। जीएसटी लागू होने से आटा, दाल, चावल, तेल, मसाले जैसे पैक्ड सामान की कीमतों में भी 8 से 10 फीसदी तक का इजाफा हो गया है, जिससे आम जनता की जेब पर असर पड़ा है।

सरकार का फैसला समझ से परे

गृहिणी पारुल बिलाला का कहना है, आमदनी की तुलना में महंगाई कई गुना तेजी से बढ़ रही है। 25 किलो या इससे अधिक का कोई सामान खरीदने पर जीएसटी (GST) से छूट है। समझ नहीं आ रहा कि एक पैकिंग में कोई इतना सामान खरीदकर क्या करेगा? सरकार का यह फैसला समझ से परे है।

खुले प्रोडक्ट पर छूट पर मिलावट का डर

हालांकि, जीएसटी (GST) सिर्फ पैक्ड फूड पर ही प्रभावी है। यानी खुले अनाज, तेल, मसाले, दाल, दलहन, चावल, गेहूं को जीएसटी से छूट दी गई है। मौजूदा दौर में 70 फीसदी से अधिक बाजार पैक्ड फूड का ही है। खुले प्रोडक्ट में मिलावट की आशंका बनी रहती है।

महंगाई पर नियंत्रण जरूरी

पेट्रोल-डीजल के साथ जीवन यापन भी महंगा होता जा रहा है। खाद्य पदार्थों पर जीएसटी (GST) लगाकर सरकार ने और महंगाई बढ़ा दी। कम से कम रसोई में इस्तेमाल होने वाले सामान में पर तो महंगाई का असर नहीं पड़ना चाहिए।

- मीना विनायका, गृहिणी

दाल, चावल, आटा, तेल, मसाले हर रसोई की जरूरत है। 5 फीसदी जीएसटी (GST) लगने के बाद से ही पैक्ड आइटम की कीमतें 10 फीसदी तक बढ़ गई हैं। सरकार को इस पर राहत दिलाने के लिए कदम उठाना चाहिए।

- सपना लुहाडिय़ा, गृहिणी

अब तक रसोई का मासिक बजट 7 से 8 हजार रहता है। जीएसटी लगने के बाद खर्च 9 हजार रुपए महीना तक पहुंच जाएगा। यह महंगाई निश्चित रूप से कई घरों का बजट बिगाड़ेगी।

- उषा गंगवाल, गृहिणी

ज्यादातर मध्यमवर्गीय घरों में अनब्रांडेड पैक्ड फूड ही इस्तेमाल होता रहा है। ब्रांडेड आइटम पर सरकार पहले ही जीएसटी ले रही है। कम से कम गैर-ब्रांडेड आइटम पर छूट जारी रखी जाना चाहिए थी।

- दीपिका बैद, शिक्षिका