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केरल का खास पर्व ओणम, जानिए क्यों है ये इतना खास?

ऐसा ही एक त्योहार है ओणम। ओणम केरल का खास पर्व माना जाता है। इस त्योहा को हम लोग केरलवासियों का दिवाली पर्व जैसा मान सकते हैं।

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onam festival

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इंदौर. भारत में तरह तरह के लोग है। कई तरह के धर्म भी हैं। सभी अपने धर्म के हिसाब से पूजा पाठ व त्योहार मनाते हैं। इसलिए भारत देश में हर समय कहीं न कहीं त्योहार की खुशी मनती दिखाई पड़ती है। ऐसा ही एक त्योहार है ओणम। ओणम केरल का खास पर्व माना जाता है। इस त्योहा को हम लोग केरलवासियों का दिवाली पर्व जैसा मान सकते हैं। केरल के निवासी इस त्योहार की तैयारी बड़ी ही धूमधाम से करते हैं। नए कपड़े से लेकर घर की साज सज्जा तक सब कुछ नया लाते हैं। घर में भी कई तरह के पकवान बनाए जाते हैं। इस त्योहार क तैयारी लगभग एक महीने पहले से शुरू हो जाती है। यह मल्याली किसानों का खास त्योहार होता है। इस त्योहार के लिए राज्य सरकार 4 दिन की छुट्टी घोषित करते हैं।इस त्योहार की महत्ता बहुत है पर क्या आप जानते हैं कि यह त्योहार क्यों मनाया जाता है और इसे कैसे मनाते हैं। आईए हम आपको बताते हैं।

यह त्योहार राजा महाबली के सम्मान में मनाया जाता है। ओणम को हर साल अगस्त और सितंबर के बीच में ही मनाते हैं। केरलवासी दुनिया के किसी भी कोने में हों पर वे इस त्योहार को बड़ी ही धूमधाम और खूब खानपान के साथ मनाते हैं। भारत को वैसे ळाी कई संस्कृतियों का जन्मदाता माना जात है. यहां लोग अलग अलग तरह के त्योहार मनाते हैं और ओणम भी उनमें से एक है, जो विशेषतौर पर केरल में मनाया जाता है, लेकिन इसकी धूम दुनियाभर मेंं भी रहती है। खेतों की अच्छी फसल के बाद इसे मानाने की प्रथा है। इस त्योहर पर केरल में कई कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें से एक है नौका रेस, जो कि केरल ही नहीं बल्कि पुरी दुनिया में फेमस है।

मंदिर में नहीं घर में होती है पूजा
वैसे तेा आमतौर पर लगभग हर त्योहार को मंदिर में जाकर मनाते हैं। पर इस त्योहार की विशेषता है कि इसे लोग मंदिरों में नहीं, बल्कि अपने घरों में पूजा करते हैं। इस त्योहार के पीछे की कहानी है कि केरल में महाबली नाम का एक असुर राजा था, जिसके सम्मान में स्वरूप लोग ओणम का पर्व मनाते हैं। ओणम त्येाहार को 10 दिन के लिए मनाया जाता है। इसमें सर्प नौका दौड़, कथकली नृत्य और गाना भी होते हैं। केरल में फसल पकने की खुशी में लोगों के मन में एक नई उमंग, नई आशा और नया विश्वास रहता है। इस खुशी में लोग श्रावण देवता और फूलों की देवी का पूजन करते हैं।

मिलजुलकर खुशियां मनाते हैं
केरल में 10 दिनों के लिए घरों को फूलों से सजाया जाता है। ओणम को हर साल श्रावण माह की शुक्ल त्रयोदशी में मनाया जाता है। सभी लोग आपस में मिलकर खुशियां मनाते हैं। असल में केरल में इन दिनों चाय, अदरक, इलायची, काली मिर्च और धान की फसल तैयार हो चुकी होती है और लोग फसल की अच्छी उपज की खुशी में ये त्योहार मानकर आपस में खुशियां बांटते हैं।

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