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28 साल बाद आईडीए बोला, मुआवजा ले लो

- किसान ने कहा जमीन लेना है तो नए सिरे से करें भू-अर्जन- भूअर्जन अधिकारी पर लगाया गलत जानकारी देने का आरोप

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ida indore scheme 94

ida indore

इंदौर।

योजना 94 की एक जमीन को लेकर आईडीए को 28 साल बाद मुआवजा देने की याद आई। आईडीए ने किसान को मुआवजा उठाने का पत्र भेजा तो किसान ने उसका जवाब कुछ यूं दिया कि अफसर समझ नहीं पा रहे हैं कि अब क्या करें। किसान ने सीधे ही भू-अर्जन अधिकारी पर झूठ बोलने का आरोप लगाते हुए कहा कि 28 साल पहले हुई भू-अर्जन कार्रवाई का अब कोई औचित्य नहीं बचा है। अब जमीन चाहिए तो नए सिरे से अर्जन करो।
आईडीए की भू-अर्जन शाखा ने 28 मई को खजराना निवासी गफ्फार पटेल को पत्र भेजा। इसमें कहा गया है कि योजना क्रमांक 94 में शामिल ग्राम खजराना की जमीन खसरा नंबर 59-पार्ट की 1.258 हेक्टेयर और खसरा नंबर 504-पार्ट की 0.769 हेक्टेयर जमीन का अवार्ड 20 मार्च, 1991 को अकबर मुंशी एवं उनके पिता सुलेमान के नाम से पारित किया गया था। जमीनों का कब्जा प्राधिकरण को प्रशासन के जरिए 6 मई, 1992 को मिला। पारित अवार्ड के तहत मुआवजा राशि भू-अर्जन कार्यालय, कलेक्टोरेट में तत्समय जमा करवा दी गई थी। वहां से राशि प्राप्त कर सकते हैं।

यह पत्र मिलने के बाद किसान गफ्फार पटेल ने कल प्राधिकरण अध्यक्ष व कमिश्नर के साथ सीईओ के को पत्र दिया, जिसमें कहा है कि भू-अर्जन अधिकारी का अवार्ड जमा करवाने संबंधी कथन झूठा है और प्राधिकरण ेमें मौजूद दस्तावेजी साक्ष्यों के भी विपरीत है। इसके साथ किसान ने प्रमाण भी दोनों अधिकारियों को दिए हैं और कहा है कि भू-अर्जन अधिकारी किसानों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से जानबूझकर मिथ्या लेख कर रहे हैं।

ये तथ्य किए पेश
किसान ने दोनों अधिकारियों को दिए गए पत्र के साथ जो प्रमाण दिए हैं, उनमें पेश किए गए तथ्यों से साफ है कि भू-अर्जन की पुरानी कार्रवाई का अब कोई औचित्य नहीं बचा है और यदि आईडीए को जमीन लेना है तो उसे नए सिरे से अर्जन करना होगा, वह भी नए लैंडबिल के मुताबिक। किसान की आपत्ति-

- योजना 94 में खजराना की जमीनों का अवार्ड 20 माच, 1991 को पारित किया गया। इसकी अवार्ड राशि 1.२२ करोड़ रुपए आईडीए ने भू-अर्जन कार्यालय में तय दिनांक पर जमा नहीं की।
- आईडीए ने 7 मई, 91 को अवार्ड राशि का पार्ट पेमेंट 50 लाख रुपए चेक के जरिए जमा किया। यह राशि जिन किसानों को वितरित की गई, उसकी लिस्ट भी है।

- तत्कालीन कलेक्टर ने 24 सितंबर, 1996 में आईडीओ के पत्र लिखकर शेष मुआवजा राशि ७२.३४ लाख जल्द से जल्द जमा करवाने को कहा था।
- कलेक्टर के लगातार पत्राचार के बाद भी आईडीए शेष मुआवजा राशि अवार्ड के 12 साल बाद 23 अगस्त, 2003 को जमा करवाई थी।

- पूर्व के भू-अर्जन अधिकारी ने भी स्वीकार किया है कि मुआवजा राशि के पार्ट पेमेंट के बाद शेष राशि 12 साल बाद जमा करवाई गई थी।
किसान ने मांगा जवाब

किसान ने इन तथ्यों के आधार पर राज्य शासन के उस आदेश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि नए लैंड बिल की धारा 24 (2) में साफ है कि यदि किसी जमीन का मुआवजा पास किए को पांच साल से अधिक का समय बीत गया और यदि जमीन का भौतिक कब्जा नहीं लिया व मुआवजा का भुगतान नहीं किया है तो ऐसे मामलों में पारित अवार्ड शून्य माने जाएंगे।

शासन ने भी यह आदेश 29 जनवरी, 2004 को सभी कलेक्टरों को दिया है और ऐसे मामलों में नए सिरे से कार्रवाई करने को कहा है। इस आदेश से साफ है कि 1991 में पारित अवार्ड शून्य हो चुका है, इसलिए आईडीए या तो इस जमीन की एनओसी दे या नए सिरे से भू-अर्जन कार्रवाई कर मुआवजा दे। साथ ही गलत जानकारी देने पर भू-अर्जन अधिकारी पर कार्रवाई करने की भी मांग की है।