
इंदौर। ऑनलाइन गेम्स के जरिए जीती जाने वाली रकम पर भारी-भरकम टैक्स चुकाने का प्रावधान है। कुछ समय से बड़ी संख्या में युवा इन गेम्स में राशि जीत रहे हैं, लेकिन रिटर्न में इसकी जानकारी नहीं दे रहे हैं। आयकर विभाग अब ऑनलाइन गेम्स खेलने वालों पर भी नजर गढ़ाए हुए है।
कई गेमिंग प्लेटफॉर्म हजारों-लाखों रुपए जीतने का लालच देकर युवाओं को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। बीते दिनों ऐसे गेम्स खेलने वालों की संख्या में बेतहाशा इजाफा हुआ। पिछले तीन साल में ही ऑनलाइन गेम्स के जरिए अलग-अलग कंपनियों ने देशभर में 58 हजार करोड़ रुपए के इनाम बांटे। जीतने वालों ने इस आय को अपने इनकम टैक्स रिटर्न में नहीं बताया है।
आयकर विभाग ने सभी गेमिंग प्लेटफॉर्म पर नजर रखने के साथ ही इनामी राशि जीतने वालों के रिकॉर्ड भी खंगालना शुरू कर दिए है। आइसीएआइ इंदौर शाखा के पूर्व अध्यक्ष सीए पंकज शाह बताते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग की कमाई पर 30 फीसदी की दर से टैक्स चुकाना अनिवार्य है। अगर कोई भी व्यक्ति इस आय को छिपाता है तो उससे आयकर विभाग 300 प्रतिशत तक पैनल्टी वसूल सकता है।
खर्चों पर कोई छूट नहीं, टीडीएस भी नहीं काट रही कंपनियां
नियमानुसार ऑनलाइन गेम्स खिलाने वाली कंपनियों को किसी व्यक्ति के जीतने पर उसे दी जाने वाली राशि पर टीडीएस काटना अनिवार्य है। लेकिन, कंपनियां इस नियम को दरकिनार कर रही हैं। गेमिंग से होने वाली कमाई में किसी भी तरह से खर्च की छूट नहीं दी जाती। इतना ही नहीं, ये राशि ढाई लाख की छूट सीमा से कम होने के बावजूद रिटर्न में शामिल कराई जाना है।
पैनल्टी से बचने के लिए संशोधित रिटर्न का विकल्प
सीए नारायण सोमानी ने बताया कि हाल ही में आयकर विभाग द्वारा कई बड़े शहरों में गेमिंग कंपनियों पर छापे की कार्रवाई की गई है। इसके आधार पर आने वाले दिनों में नोटिस जारी किए जाएंगे। अपडेटेड रिटर्न फाइल करने पर टैक्स और ब्याज की राशि पर 25 फीसदी अतिरिक्त राशि लगती है। इससे नोटिस आने की और पेनल्टी लगने की संभावना खत्म हो जाती है।
Published on:
31 Aug 2022 08:28 am
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