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भगत सिंह से प्रभावित होकर बदला नाम, ले आए वीरों के घर की मिट्टी

उस दौर के किस्से सुने तो जागा जुनून, अब देशभर में घूमकर जान रहे स्वतंत्रता सेनानियों की कहानी

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इंदौर

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Manish Geete

Aug 15, 2023

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भगत सिंह का निडर अंदाज, देश के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा, मातृभूमि की आजादी के लिए शादी से इनकार करना, मौत पर मां का कमजोर न पड़ते हुए शव तक लाने से मना करने जैसे कई किस्से आज भी युवाओं को प्रेरित करते हैं। शहर के राहुल इंकलाब साल 2010 में जब भगत सिंह के परिवार से मिले तो इतने प्रभावित हुए कि इसके बाद वह स्वतंत्रता सेनानियों के लिए ही काम करने लगे। राहुल देशभर में घूमकर स्वतंत्रता सेनानियों के परिजन से मिलकर उनकी बहादुरी के किस्से जानने की कोशिश करते हैं। क्रांतिकारियों से ही प्रेरित होकर राहुल ने अपने नाम के साथ इंकलाब लगाया है।

50 क्रांतिकारियों के घर की मिट्टी

भगत सिंह का किस्सा सुनाते हुए राहुल बताते हैं कि 1919 में अमृतसर के जलियावाला बाग में अंग्रेजों ने निहत्थे भारतीयों को गोलियों से भून दिया था। इस नरसंहार की खबर जब भगत सिंह को लगी तो वह लाहौर से अमृतसर पहुंचे और जलियावाला बाग की मिट्टी अपने साथ ले गए, ताकि वह घटना की याद दिलाती रहे। भगत सिंह की इसी बात को याद रखकर राहुल ने भी करीब 50 क्रांतिकारियों के घरों की मिट्टी लाकर अपने पास रखी है। कोई भी क्रांतिकारी अपने नाम के साथ सरनेम नहीं लगाते है। इसके पीछे जाति-धर्म से परे उनकी सोच है। वह सिर्फ हिंदुस्तानी थे। इसी तरह राहुल भी किसी जाति-धर्म को नहीं मानते हैं।

भगत सिंह की जेल नोट्स

राहुल को भगत सिंह के परिवार से मिलने के दौरान उनकी जेल डायरी मिली, जिसे उन्हें एडिट करने का मौका मिला। राहुल ने इस जेल डायरी से कई अनसुने किस्से निकाले और साल 2016 में भगत सिंह की जेल नोट्स के नाम से दो एडिशन निकाले। इसके बाद सशक्तिकरण आजादी की एक उड़ान, शौर्य वीरांगना, शहीद सुखदेव द बिलेजर किताबें भी तैयार की।

शादी के लिए दिया लालच

भगत सिंह के परिवार से सुना किस्सा याद करते हुए राहुल बताते हैं कि भगत सिंह शादी के लिए कभी तैयार नहीं थे। इसके लिए परिवार वाले उन्हें लालच देते थे कि सामने वाले बहुत पैसे वाले हैं। शादी के बाद हमें खेत, हाथी, पशु मिलेंगे। इस पर वह कहते हैं कि वो खेत को उजाड़ते रहेंगे और मैं उनकी लीद साफ करता रहूंगा। इसके अलावा भगत सिंह के शौर्य से प्रेरित होकर डॉ. गयाशंकर कटियार ने आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए पत्नी की मांग से सिंदूर मिटा दिया था।

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