
इंदौर. इंदौर और भोपाल में मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए लांग टर्म लोन को मंजूरी मिलने के बाद अब निधि जुटाने की कवायद शुरू हो गई है। प्रारंभिक कार्य के लिए 200 करोड़ रुपए स्टाम्प ड्यूटी से जुटाए जाएंगे। इससे आगामी माह में चरण एक का काम शुरू हो जाएगा। इंदौर में 5.29 किमी का ट्रैक एमआर-10 से मुमताज बाग खजराना के बीच बनेगा। भोपाल में एम्स से सुभाष नगर तक 6.२५ किमी का ट्रैक आकार लेगा। मेट्रो रेल कंपनी के एमडी विवेक अग्रवाल के मुताबिक इंदौर के लिए एशियन डेवलपमेंट व न्यू डेवलपमेंट बैंक और भोपाल के लिए यूरोपियन इनवेस्टमेंट बैंक से राशि मिलेगी। प्रोजेक्ट के लिए कर्ज से ६० प्रतिशत राशि जुटाई जाएगी, जबकि २० केंद्र और २० प्रतिशत राज्य सरकार अंशदान देगी।
हाल की में मेट्रो रेल की नई नीति के तहत देश के पांच नए शहरों में मेट्रो रेल परियोजना के संचालन को सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई। सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। मेट्रो रेल की नई नीति के तहत देश के पांच नए शहरों में मेट्रो रेल परियोजना के संचालन को सरकार की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। नई मेट्रो नीति के तहत उत्तर प्रदेश के तीन शहरों कानपुर, आगरा, मेरठ और मध्य प्रदेश की भोपाल, इंदौर की मेट्रो रेल परियोजनाओं को वित्त मंत्रालय से स्वीकृति मिल गई है। केंद्रीय शहरी विकास सचिव डीएस मिश्रा ने बताया कि वित्त मंत्रालय ने दिल्ली में मेट्रो रेल के चौथे चरण के मसौदे पर भी हामी भरी है।
मिश्रा ने एक विशेष बातचीत में कहा कि रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) के प्रस्ताव को पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) में भेज दिया गया है। उसकी मंजूरी के बाद प्रस्ताव के आधार पर कैबिनेट नोट तैयार किया जाएगा। आरआरटीएस राजधानी दिल्ली और मेरठ के बीच बनेगा, जिससे यह दूरी मात्र 45 मिनट में तय हो जाएगी।
इंदौर और भोपाल मेट्रो रेल परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी-
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल और राष्ट्रीय स्वच्छता सर्वेक्षण में देश में अव्वल इंदौर के लिए तैयार मेट्रो रेल परियोजनाओं पर होने वाले खर्च को मंजूर कर लिया गया है। मेट्रो रेल की श्रीधरन कमेटी गठित शहरी विकास सचिव मिश्रा ने बताया कि मेट्रो रेल के प्रणेता ई. श्रीधरन की अध्यक्षता में केंद्र सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति देश के विभिन्न शहरों में बनने वाली मेट्रो रेल की लागत में कटौती करने के लिए गठित की गई है। इसके तहत मेट्रो रेल के स्वदेशीकरण और मानकीकरण पर जोर दिया जाएगा। फिलहाल सभी मेट्रो रेल के अलग-अलग मानक बने हुए हैं, जिनमें समानता लाने से उत्पादन लागत में बहुत कमी आने की उम्मीद है। इसके तहत मेट्रो रेल के डिब्बों व इंजन का मानकीकरण पहले ही कर दिया गया है।
कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रिफिकेशन की दिशा में बहुत कुछ काम करना है। उन्होंने बताया कि मेट्रो स्टेशनों के मानकीकरण से बहुत अधिक बचत की उम्मीद है। रेलवे से तकनीकी सहमति लेने में बहुत समय लगता था, जो श्रीधरन कमेटी के गठन से बहुत जल्दी हो जाएगा। शहरी विकास सचिव मिश्रा ने बताया कि नीति आयोग के इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री कार्यालय की मंजूरी मिल गई है। यह पहल न्यू इंडिया के तहत की गई है।
Published on:
22 Jul 2018 11:04 am
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