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 झुग्गियों से फ्लैट की तरफ बढ़ चले सीपी शेखर नगर के बाशिंदे

40 साल से खान नदी किनारे बसी कॉलोनी का विस्थापन, 25 ट्रकों के साथ सुबह से डटा निगम का अमला

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Abha Sen

Aug 16, 2015

river

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इंदौर. चालीस साल पुरानी शेखरनगर बस्ती का रविवार को विस्थापन शुरू हो गया। नगर निगम और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास रंग लाए और रहवासी शुरुआती विरोध के बाद शांतिपूर्ण रूप से बस्ती खाली करने को राजी हो गए।
निगम का अमला यहां उपायुक्त महेंद्रसिंह चौहान की अगुवाई में 25 ट्रक लेकर पहुंचा था। इन्हीं ट्रकों से बस्ती वालों का सामान और बस्ती वाले नई जगह शिफ्ट किए गए। सुबह 9.30 से शिफ्टिंग शुरू हुई थी। दोपहर तक दो दर्जन से ज्यादा परिवार नैनोद और बड़ा बागड़दा क्षेत्र में गरीबों के लिए बने नए आवासों में शिफ्ट हो गए। नई जगह पर निगम की तरफ से बिजली पानी की सुविधा भी हाथोहाथ की गई। विस्थापन के कारण बस्ती वालों को भोजन भी नगर निगम की तरफ से वितरित किया गया। शुक्रवार को बस्ती के 1400 परिवारों को लॉटरी के जरिए एक बेडरूम कीचन हाल का फ्लैट दिया गया। आज सुबह से कतार लगाकर रहवासियों को इसके कागज भी निगम अधिकारियों से लिए।

कलेक्टर ने किया था वादा

कलेक्टर पी नरहरी ने इंदौर की कमान संभालते ही बस्ती का दौरा कर रहवासियों को नारकीय जीवन से छुटकारा दिलाने का वादा किया था। रविवार को ये योजना सफल होती तब नजर आई, जब एक साथ बस्ती खाली होना शुरू हुई। हालांकि सुबह निगम अधिकारियों को बस्ती वालों ने घेर लिया। इसमें वो 200 से ज्यादा परिवार थे, जो लॉटरी के दायरे में नहीं आ पाए थे। इन लोगों का कहना था, हमारे पास भी पट्टे हैं। अधिकारियों ने समझाइश दी कि एक भी परिवार बेघर नहीं रहेगा, केवल कागजी कार्रवाई पूरी करने दे। इसके बाद स्थानीय पार्षद रत्नेश बागड़ी के सहयोग से रहवासियों को एक एक कर बस्ती से बाहर निकालना शुरू किया।