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एमपी के इस जिले को मिला 6 लाख करोड़ का निवेश, 400 एकड़ जमीन पर आएगा प्रोजेक्ट

Global Investors Summit 2025: इंदौर में ओमेक्स ग्रुप ने सुपर कॉरिडोर पर करीब 400 एकड़ जमीन पर नया प्रोजेक्ट लाने का प्रस्ताव दिया है।

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Global Investors Summit

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Global Investors Summit 2025: भोपाल में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट इंदौर व आसपास के लिए बड़े पैमाने पर शुभ निवेश लेकर आया है। दो दिन में इंदौर-उज्जैन के लिए करीब 6 लाख करोड़ के प्रस्ताव मिले हैं। रियल एस्टेट, एजुकेशन और मेडिकल सेक्टर में देश के बड़े ग्रुप रुचि दिखा रहे हैं।

एजुकेशन हब बन रहे इंदौर में कई बड़े ग्रुप कॉलेज व टेक्नीकल इंस्टिट्यूट खोलने के लिए प्रस्ताव लेकर आए हैं। सरकार का प्रयास अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी को आमंत्रित करने का था, जिसे लेकर भी एक प्रस्ताव मिलने की बात कही जा रही है। कई बड़े ग्रुप प्रोजेक्ट लेकर आए हैं।

ओमेक्स ग्रुप ने नए प्रोजेक्ट का दिया प्रस्ताव

ओमेक्स ग्रुप ने सुपर कॉरिडोर पर करीब 400 एकड़ जमीन पर नया प्रोजेक्ट लाने का प्रस्ताव दिया है। प्रदेश के बाहर के ग्रुप भी यहां बड़े व्यवसायिक व आवासीय प्रोजेक्ट ला रहे हैं। सरकार इनमें मदद करेगी। टूरिज्म सेक्टर में भी कई बड़े प्रस्ताव मिले हैं। इंदौर-उज्जैन में कई बड़े होटल ग्रुप आना चाह रहे हैं।

उज्जैन में नया एयरपोर्ट बनाने को लेकर एमओयू हुआ है तो कई अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट शुरू करने की भी तैयारी है। पहले दिन अदाणी, रिलायंस जैसे बड़े ग्रुप इंदौर-उज्जैन में निवेश करने का प्रस्ताव दे चुके थे। एमपीआइडीसी के कार्यकारी निदेशक राजेश राठौर ने बताया, 6 लाख करोड़ के प्रस्ताव इंदौर-उज्जैन रीजन को मिले हैं। एक-दो दिन में स्थिति स्पष्ट होगी।

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पर्यटन में 10 प्रस्ताव, छह इंदौर के लिए

पर्याटन को 10 बड़े ग्रुप के प्रस्ताव आए हैं, जिसमें से 6 अकेले इंदौर के लिए हैं। प्रस्ताव देने वालों में स्वर्णमुखी रिक्रिएशन एंड हॉस्पिटिलीटी, लयोला इंडिया, अध्यात्म ग्राम ओंकारेश्वर, अमलतास होटल्स, ओमनी, शैकी एस ग्रुप शामिल हैं।

ये भी मिले: इंदौर के लिए निवेशकों ने खनिज, नवकरणीय, उद्योग विभाग, शहरी विकास, उर्जा, स्वास्थ्य- मेडिकल, विज्ञान और प्रौद्योगिकी सेक्टर में प्रस्ताव दिए।

एक्सपोर्ट इकाई : उद्योगों को सब्सिडी

सरकार ने औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025 भी लागू की है, जिसमें एक्सपोर्ट इकाई लगाने के साथ हरित उद्योग के लिए भी प्रावधान किए हैं। उद्योगपतियों का मानना है कि नीति राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने के साथ सामाजिक-आर्थिक संतुलन बनाने का उद्देश्य रखती है। स्मॉल ड्रग्स मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के महासचिव अजय सिंह दासुंदी के मुताबिक, नीति के प्रावधानों से फार्मास्यूटिकल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, जिससे दवाओं और चिकित्सा उपकरणों का प्रमुख उत्पादक बन जाएगा।

नई नीति के मुख्य बिंदु

-नवीकरणीय ऊर्जा पर आधारित कैप्टिव पावर को 50% सब्सिडी।

-ऊर्जा-बचत उपकरणों पर 20% सब्सिडी।

-एक्सपोर्ट इकाइयों के लिए अतिरिक्त पूंजी सब्सिडी, 1 से 1.3 गुना की सीमा तक।

-रोजगार आधारित सब्सिडी।

-हरित उद्योगों के लिए प्रोत्साहन, ईटीपी व एसटीपी के लिए 50% या 5 करोड़ रुपए तक मदद।

-गैस पाइपलाइन के लिए आंतरिक बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 50% या 2 करोड़ रुपए की मदद।

-विकलांग रोजगार के लिए ईपीएफ व ईएसआई प्रतिपूर्ति।

-निर्यात माल के लिए 40 लाख रुपए प्रति वर्ष या 2 करोड़ रुपए तक की परिवहन सब्सिडी।

-इन-हाउस आरएंडडी सेटअप के लिए 50% सब्सिडी।

-गुणवत्ता प्रमाणीकरण में 50% सब्सिडी या 1 करोड़ की मदद।

-परीक्षण प्रयोगशाला के लिए 50% सब्सिडी या 1 करोड़।