
super corridor indore
इंदौर. शहर को नया स्वरूप देने के लिए तैयार सुपर कॉरिडोर पर विकास अब सुपर ट्रैक पर दौड़ेगा। सरकार ने कॉरिडोर पर भवन निर्माण की अनुमति जारी करने में आ रही बाधा दूर कर दी है। इसके लिए नगर पालिका अधिनियम के नियम-16 में बदलाव किए हैं। अब कॉलोनाइजर लाइसेंस व विकास अनुमति मिलने के बाद ही नगर निगम भवन अनुज्ञा यानी बिल्डिंग निर्माण के लिए अनुमति जारी की जा सकेगी। इससे सुपर कॉरिडोर पर भवन निर्माण शुरू हो सकेंगे। अब अनुमति के लिए आइडीए द्वारा विकास कार्य पूर्ण करने का इंतजार नहीं करना होगा।
शहर को पश्चिम में विकसित करने के लिए बायपास और एयरपोर्ट के बीच सुपर कॉरिडोर का निर्माण किया गया है। इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर दोनों ओर 300 मीटर तक विशेष प्रयोजन और विविध उपयोग के लिए प्लॉट दिए गए हैं। जमीन मालिकों से अनुबंध कर जमीन ली गई है। इसके आसपास आइडीए अलग-अलग योजनाएं विकसित कर मूलभूत सुविधाओं का निर्माण कर रहा है। यह योजना 2006-07 में शुरू की गई थी, लेकिन जमीन नहीं मिलने और कानूनी उलझनों के कारण आंतरिक विकास कार्य पूर्ण नहीं हो रहे हैं। इससे नगर निगम यहां प्लॉट धारकों को भवन निर्माण या बिल्डिंग परमिशन जारी नहीं कर रहा है। जबकि, पानी-बिजली-सडक़-ड्रेनेज-स्टार्म वाटर लाइनें बनाने का काम आइडीए पूरा कर चुका है। कॉरिडोर पर इंटरनेशनल होटल ग्रुप, आइटी कंपनियां व कुछ फाइनेंस कंपनियों ने प्लॉट लिए हैं, लेकिन अनुमति के अभाव में निर्माण नहीं कर पा रहे हैं। आइडीए सीइओ विवेक श्रोत्रिय के अनुसार, अनुमति का मुद्दा लगातार सरकार के समक्ष रखा जा रहा था। 13 जनवरी को नगरीय आवास विभाग ने कॉलोनी विकास नियमों में किए गए बदलावों का प्रकाशन कर दिया है। नियम-16 में बदलाव के बाद अब कॉरिडोर पर अनुमति दी जा सकेगी। इस बदलाव से कॉरिडोर के आसपास व्यावसायिक व आवासीय विकास में तेजी आएगी।
निजी विकासकर्ता को भी फायदा
इस नियम का फायदा सिर्फ आइडीए के लिए ही नहीं होगा, निजी विकासकर्ता डेवलपर्स-बिल्डर्स को भी फायदा होगा। वह कॉलोनी विकास के साथ ही भवन निर्माण भी कर सकेंगे। इससे बसाहट और आंतरिक विकास कार्य तेजी से होंगे। सरकार ने कॉलोनी विकास के अन्य नियमों में किए गए संशोधन भी लागू कर दिए हैं।
ऐसे मिलेगा फायदा
वर्तमान स्थिति - वर्तमान स्थिति में नगर निगम किसी भी कॉलोनी या योजना का आंतरिक व बाह्य विकास कार्य पूरा होने के बाद ही भवन निर्माण की अनुमति जारी करता है।
संशोधन के बाद - अब विकास अनुमति मिलने के बाद ही किसी भी कॉलोनी या योजना क्षेत्र में बिल्डिंग परमिशन दी जा सकेगी। इसका लाभ सिर्फ सुपर कॉरिडोर पर ही नहीं होगा। पूरे शहर में डेवलपर्स व बिल्डर्स को आसानी होगी।
दो साल में बदलेगी तस्वीर
भवन निर्माण की अनुमति मिलने और मेट्रो ट्रेन के ट्रैक का निर्माण शुरू होने से अगले दो साल में सुपर कॉरिडोर की तस्वीर बदल जाएगी। बायपास की तरह ही इसके आसपास भी तेजी से विकास होगा। एयरपोर्ट रोड व धार रोड के बीच भी आवासीय कॉलोनियां तेजी से आकार लेंगी।
Published on:
18 Jan 2022 06:16 pm
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