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डाॅ. आंबेडकरनगर महू. कोरोना संक्रमण की शुरूआत पर बीते वर्ष मार्च के अंतिम सप्ताह में ट्रेनों के डिब्बों को आइसोलेशन कोच में तब्दील किया गया। महू में ऐसे 17 कोच तैयार किए गए थे, जिनका कोई इस्तेमाल नहीं हुआ और वे अलग-अलग स्टेशन जब से अब तक बेकार पड़े हुए हैं।
जानकारी अनुसार महू में 17 तो इंदौर में ऐसे 22 कोच को आइसोलेशन कोच में तब्दील किया था। जिसका उद्देश्य था कि यदि कोरोना के मरीज बढ़े तो उन्हें यहां शिफ्ट किया जा सकेगा। एक कोच में दो मरीजों को रखने की प्लानिंग थी। हालांकि अब ये निर्णय फिजुलखर्ची साबित हुआ। क्योंकि किसी भी आइसोलेशन कोच का इस्तेमाल आज तक नहीं हुआ। अब ये कोच मांगलिया, उज्जैन सहित अन्य स्टेशन पर बेकार पड़े हुए हैं। कैरियर एंड वेगन डिपार्टमेंट के सूत्रों के अनुसार एक कोच पर 40 हजार से अधिक खर्च हुआ, जिसके तहत कोच के भीतर विभिन्न इंतजाम किए गए। यदि 40 हजार से अधिक आकलन किया जाए तो 39 कोच पर करीब 15 लाख रूपए खर्च किए गए। हालांकि डीआरएम का कहना है कि बहुत कम खर्च यानी 10 से 15 हजार में आइसोलेशन कोच तैयार किए गए थे। खास बात है कि पहले लाखों रूपए आइसोलेशन कोच के लिए खर्च किए और अब उसे फिर से सामान्य कोच में तब्दील करने में भी मोटी राशि खर्च करना पड़ेगी।
राज्य शासन के लिए तैयार किए थे
वर्जन
राज्य सरकार के लिए आइसोलेशन कोच तैयार किए गए थे जो अभी उसी स्थिति में रखे हुए हैं। यदि राज्य सरकार की ओर से कहा जाएगा कि इसकी जरूरत नहीं है तो फिर उसे कनवर्ट कर रेग्युलर कोच में रूप में चलाएंगे। वैसे, आइसोलेशन कोच काफी कम लागत में तैयार हुए थे।-विनीत गुप्ता, डीआरएम
Published on:
09 Mar 2021 08:28 pm
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