
metro train
इंदौर. सुपर कारिडोर पर मेट्रो को डिपो के लिए जमीन देने से आइडीए की स्कीम १५१ प्रभावित होगी। इसे बचाने के लिए आइडीए आगे आया है। प्रशासन को इस संबंध में अवगत भी करा दिया है। प्राधिकरण ने साफ कर दिया है कि सुपर कॉरिडोर स्कीम प्रभावित हो जाएगी। प्रशासन इस मामले में मेट्रो प्रोजेक्ट के अधिकारियों के साथ बैठक कर रास्ता निकालने की तैयारी में है। दरअसल, पिछले दिनों एमपीआरसीएल की महाप्रबंधक शोभा खन्ना द्वारा मौखिक रूप से सुपर कॉरिडोर जमीन पसंद की गई थी। इसके बाद राजस्व अधिकारियों ने सीमांकन भी किया। डिपो के लिए जिस जमीन का सीमांकन किया वह प्राधिकरण की योजना १५१ में शामिल होकर वन विभाग की है।
वन विभाग को राशि भी दे चुका है आईडीए
चूंकि उक्त भूमि में से स्कीम १५१ में वन विभाग की १५.२१७ हेक्टेयर जमीन शामिल है। उक्त जमीन के बदले कलेक्टर इंदौर द्वारा हातोद स्थित ग्राम रेवती और गोहान में कुल १५.२१७ हेक्टेयर जमीन दी गई। वन विभाग द्वारा योजना से प्रभावित जमीन के लिए एनपीवी राशि (नेट प्रोजेक्ट वेल्यू) कुल राशि ९५,२५,८४२ रुपए की मांग की गई थी, जिसे साल २००९ में ही प्राधिकरण ने वन विभाग को जमा करा चुका है।
ये काम होना है
सुपर कॉरिडोर पर ७५ मीटर मार्ग की चौड़ाई में जल प्रदाय, स्टॉर्म वाटर व ड्रेनेज लाइन, सर्विस रोड, नालों का चैनलाइजेशन, वृक्षारोपण, स्ट्रीट लाइट, भूमिगत विद्युत केबल, ट्रांसफॉर्मर्स, आरएमयू आदि काम वन भूमि के भाग पर होना शेष है।
जमीन न दें
आइडीए ने प्रशासन को कहा, भूमि मेट्रो रेल डिपो को जमीन देने सेेसुपर कॉरिडोर योजना का क्रियान्वयन संभव नहीं होगा। सुपर कॉरिडोर योजना १५१ में शामिल वन विभाग की जमीन का आवंटन न किए जाने की बात आइडीए ने कही है।
वह जमीन वन विभाग की है। एेसा नहीं है कि हम मना कर रहे हैं। कलेक्टर से इस विषय पर चर्चा चल रही है। मेट्रो के अधिकारियों को बुलाया है। जल्द ही मीटिंग कर समाधान हो जाएगा।
गौतम सिंह, सीईओ, आईडीए
Published on:
17 May 2018 10:46 am
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