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जूनियर डॉक्टर नहीं लिख सकेंगे मरीजों को जांच

एमवाय अस्पताल में लागू हुई नई व्यवस्था,  सीनियर कंसलटेंट तय करेंगे, जांच करवाना है या नहीं

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इंदौर

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Amit Mandloi

Oct 22, 2017

m y hospital

इंदौर. एमवाय अस्पताल में मरीजों को बाहर से जांचें लिखे जाने के मामले लगातार सामने आने के बाद अब नई व्यवस्था लागू की गई है, जिसके अंतर्गत जूनियर डॉक्टर मरीजों को जांच नहीं लिख सकेंगे। इसके लिए उन्हें सीनियर कंसलटेंट के पास मरीजों को भेजना होगा। सीनियर कंसलटेंट तय करेंगे, जांच करवाना है या नहीं।
पिछले दिनों संभागायुक्त की जूनियर डॉक्टर पर हुई कार्रवाई के बाद यह बात भी सामने आई थी कि जूनियर डॉक्टरों को नहीं पता होता कि कौनसी जांच अस्पताल में हो रही है और कौन सी नहीं। ऐसे में अब जूनियर डॉक्टर सीनियर डॉक्टरों के पास मरीजों को भेजेंगे।

अस्पताल के डॉक्टरों की है निजी लैब
इस मामले में डीन ने सख्ती दिखाते हुए माइक्रोबॉयोलाजी, बॉयोकेमिस्ट्री और पैथालाजी विभाग के डॉक्टरों को निर्देश जारी किए हैं। सीनियर डॉक्टरों को भी इस पूरे निगरानी करने का कहा गया है। कारण है कि आए दिन अस्पताल के मरीजों की जांचें बाहर की निजी लैबों से करवाने की शिकायतें मिल रही थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। हालांकि अस्पताल के कई डॉक्टर स्वयं ही निजी लैबों से जुड़े हुए हैं, ऐसे में उन पर भी जांचें बाहर से लिखे जाने का आरोप लगता है। कई बार इस संबंध में शिकायतें भी हो चुकी हंैं लेकिन कभी कार्रवाई नहीं होती।

दोपहर बाद जाती है बाहर
अस्पताल में ओपीडी लगती है, तब तक तो जांचें अस्पताल में होती हैं लेकिन ओपीडी खत्म होने के बाद जब सीनियर डॉक्टर अस्पताल से चले जाते हैं, तब अधिकांश जांचें बाहर जाती है। निजी लैबों के दलाल इतने सक्रिय होते हैं कि मरीज को डॉक्टर द्वारा जांच लिखने के बाद ही उन्हें सूचना मिल जाती है। अब इन पर भी सख्ती की जा रही है।

एमवाय में बाहरी तत्वों की आवाजाही जारी
एमवाय अस्पताल में संभागायुक्त की कार्रवाई के बाद भी बाहरी तत्वों पर रोक नहीं लग पाई है।
अस्पताल की ओपीडी से लेकर वार्ड और जांच केंद्रों के बाहर मरीज के परिजनों को गुमराह कर निजी जांच सेंटरों पर ले जाने का खेल जारी है, जबकि डीन और अधीक्षक स्वयं इस पर कार्रवाई की बात कह चुके हैं, लेकिन अस्पताल के ही कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते बेरोकटोक निजी सेंटरों के दलालों की आवाजाही जारी है। कई बार इन पर कार्रवाई की बात हो चुकी है, लेकिन फिर भी रोक नहीं लग पा है। पिछले दिनों ही संभागायुक्त द्वारा एक जूनियर डॉक्टर को निलंबित किए जाने के बाद ऐसे तत्वों पर कार्रवाई की बात कही गई थी, लेकिन कोई असर होता नहीं दिख रहा है।

दिए हैं निर्देश
जूनियर डॉक्टरों को जानकारी नहीं होती, कौनसी जांच अस्पताल में हो रही है और कौन सी नहीं। अस्पताल में सीनियर डॉक्टरों को जांचें लिखने के लिए कहा गया है।
डॉ. वीएस पाल, अधीक्षक