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इंदौर की धरोहर है बापू का पेन, उपवास के समय लिया ब्लड सैंपल, शॉल, अस्थियां और उनका बुना सूत

गांधी जयंती : गांधीजी ने अपने जन्मदिन पर रखी थी कस्तूरबा ग्राम की नींव

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इंदौर

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Ramesh Vaidh

Oct 03, 2021

इंदौर की धरोहर है बापू का पेन, उपवास के समय लिया ब्लड सैंपल, शॉल, अस्थियां और उनका बुना सूत

शत्रुघ्न गुप्ता
इंदौर. राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शनिवार को 152वीं जयंती है। राष्ट्रपिता से इंदौर की भी ऐतिहासिक यादें जुड़ी हैं। उन्होंने यहां से न केवल हिन्दी भाषा के विकास की पटकथा लिखी बल्कि, महिलाओं के लिए कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट (कस्तूरबा ग्राम) की स्थापना की। ट्रस्ट की नींव अपने जन्मदिन यानी 2 अक्टूबर 1950 को रखी। 70 वर्षों से यहां राष्ट्रपिता के विचारों को आत्मसात किया जा रहा है। ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. करुणाकर त्रिवेदी बताते हैं, 1944 में कस्तूरबा गांधी के निधन के बाद महात्मा गांधी ने ट्रस्ट की स्थापना की। यहां स्थित संग्रहालय में बापू का पेन, उपवास के समय लिया गया ब्लड सैंपल, चरण पादुकाएं, बापू की शॉल, अस्थियां, भस्मी, चिता के कोयले, उनका बुना सूत समेत कई चीजें संग्रहित हैं।
आह्वान पर करोड़ जुटे
डॉ. त्रिवेदी बताते हैं, ट्रस्ट की स्थापना के लिए पैसों की जरूरत थी, तो गांधीजी ने देशवासियों से सहयोग का आह्वान किया। कुछ दिनों में एक करोड़ 75 लाख रुपए से ज्यादा की रकम जुट गई। इस राशि से गांधीजी ने ट्रस्ट का विकास किया। एकमात्र ऐसी संस्था, जिसे गांधी ने बनाया था, ट्रस्ट की २५ राज्यों में 350 से ज्यादा शाखाएं हैं।

हर कार्य में गांधी की झलक
राष्ट्रीय सचिव सूरज डामोर बताती हैं, 480 एकड़ में ट्रस्ट का विस्तार हुआ है। यहां जैविक खेती, पर्यावरण, बाल विकास, ग्रामीण महिलाओं के विकास पर काम हो रहा है। हर एक कार्य में गांधीजी के विचार नजर आते हैं। डामोर कहती हैं, ट्रस्ट की स्थापना के पीछे गांधीजी का सिर्फ एक उद्देश्य था, ग्रामीण महिलाओं और बच्चियों का उन्नयन हो।

बापू से जुड़ी अमूल्य धरोहर
खंडवा रोड स्थित कस्तूरबा ग्राम में प्रवेश करते ही गांधी दर्शन की झलक दिखती है। यहां बा यानी कस्तूरबा गांधी और महात्मा गांधी से जुड़ी कई दुर्लभ चीजें और फोटोग्राफ्स हैं। प्रार्थना हॉल में गांधी से जुड़ी कई चीजें रखी हैं। यहां कस्तूरबा गांधी के साथ बापू की कई तस्वीरें लगी हुई हैं।

लाइब्रेरी में 25 हजार किताबें
हिन्दी की श्रेष्ठ लाइब्रेरी कस्तूरबा गांधी राष्ट्रीय स्मारक ट्रस्ट की है। यहां बापू, संत विनाबा भावे, गांधीवादी विचारकों समेत तमाम हिन्दी साहित्य से जुड़े लोगों द्वारा लिखी किताबें हैं। यहां करीब २५ हजार से ज्यादा किताबें हैं। संभवत: इतनी किताबें किसी दूसरे लाइब्रेरी में नहीं होंगी। महात्मा गांधी द्वारा लिखित किताबों का बड़ा संग्रह है। बापू पर लिखीं किताबें भी हैं।