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कविता रैना हत्याकांड : पुलिस ने प्रेम जाल बुना तब शिकंजे में फंसा था महेश बैरागी

हत्याकांड से लेकर पुलिस तफ्तीश का सफर...

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इंदौर. 24 अगस्त 2015 का वो काला दिन यह शहर कभी नहीं भूल पाएगा। इस दिन मित्र बंधु नगर स्थित अपने घर से बेटी को लेने निकली कविता रैना वापस घर नहीं लौटी। वापस लौटा गठरी में बंधा ६ टुकड़ों में कटा शव। झकझोर देने वाले इस हत्याकांड के बाद पुलिस ने भी जी-जान लगाकर आरोपित महेश बैरागी को शिकंजे में ले लिया, लेकिन सबूतों के अभाव में शुक्रवार को उसे कोर्ट ने बरी कर दिया। आइए जानते हैं हत्याकांड से लेकर पुलिस तफ्तीश का सफर...

२8 अगस्त 2015 को तीन इमली चौराहा बीट संभालने वाले आरक्षक मनोज ओझा को पुलिया के पास भीड़ दिखी। वहां पहुंचे तो बोरे में एक लाश पड़ी हुई थी। आला अधिकारी और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची तो उन्हें दो बोरे मिले। एक में महिला के हाथ-पैर और दूसरे में धड़ था। हत्याकांड के छठे दिन कविता की एक्टिवा नौलखा स्थित बस स्टैंड की पार्किंग में मिल गई। स्टैंड संचालक ने पूछताछ में बताया कि २४ अगस्त को एक व्यक्ति रात ८ बजे गाड़ी रखकर गया है। रजिस्टर में उसने अपना नाम राजू लिखवाया था। हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने के लिए 70 से ज्यादा पुलिस अफसर जुटे रहे। इधर, शहर में लोगों का आक्रोश भी बढ़ता जा रहा था। सभी आरोपित की जल्द गिरफ्तारी की मांग को लेकर सडक़ पर उतर आए थे। पुलिस जांच का केंद्र पालदा रहा। पुलिस ने यहां 20 जगहों के सीसीटीवी कैमरे छाने। 50 से अधिक पुलिसकर्मी फुटेज देखने में जुटे रहे।

कविता की लाश मिलने के आठ दिन बाद 2 सितंबर 2015 को पुलिस टीम पूरा घटनाक्रम समझने के लिए उस जगह पहुंची, जहां कविता को अंतिम बार देखा गया था। यहां अधिकारियों ने घटना का नाट्यरूपांतरण किया। कविता के पति ने महेश बैरागी का नाम पहले दिन ही पुलिस के सामने लिया था। पुलिस ने जानकारी निकाली तो पता चला कि उसके खिलाफ ब्लू फिल्म बनाने और धमकी का केस दर्ज है। उसके कई लड़कियों से संबंध भी रहे हैं। कविता को टारगेट बनाने के लिए उसने बूटिक के सामने साड़ी की दुकान खोली थी। ८ दिन बाद उसने दुकान बंद भी कर दी।

पुलिस ने महिला पंटर की ली मदद

हत्याकांड के बाद महेश ३० अगस्त को उस दुकान पर सीसीटीवी फुटेज लेने भी गया था जहां पुलिस जांच करने पहुंची थी। पुलिस को मामला एकतरफा प्रेम या अवैध संबंध को लेकर लग रहा था। पुलिस ने हर उस व्यक्ति के कैरेक्टर को जांचा जो कभी न कभी रैना परिवार और खासकर कविता के संपर्क में थे। इनमें से तीन लोगों के चरित्र पर शंका थी। एक करीबी रिश्तेदार, महेश सहित ३ लोगों के लिए पुलिस ने महिला पंटर तैनात की। पंटर ने रिश्तेदार को इश्क के जाल में उलझाने का प्रयास किया तो वह पुलिस के पास पहुंच गया। दूसरा व्यक्ति भी बच गया। महेश पंटर के साथ आगे बढ़ता गया और काफी सच्चाई सामने आ गई। आखिरकार 107 दिन की मशक्कत के महेश पुलिस के हत्थे चढ़ गया।