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kedarnath tour full story: पर्वतों पर बिखरी बर्फ के बीच जगमगाता है केदारनाथ

kedarnath travel experience: तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है केदारनाथ मंदिर, पर्यटन के लिहाज से भी है मनपसंद जगह

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इंदौर

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Manish Geete

Nov 08, 2021

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इंदौर। उत्तराखंड राज्य में स्थित, हिमालय की गोद में बसा केदारनाथ एकांत व प्राचीन युग का एक पवित्र स्थान है। इसके आसपास बर्फ से ढंकी ऐसी पहाड़ियां हैं, जो अचरज में डाल देती है। हिमालय पर्वत की गोद में केदारनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग में सम्मिलित होने के साथ चार धाम और पंच केदार में से भी एक है।

शहर की आशी चौहान ट्रैकिंग और घूमने की शौकीन है। आशी ने हाल ही में की गई केदारनाथ यात्रा के अनुभव पत्रिका के साथ साझा किए। पेश हैं कुछ अंश...।

शिव मंदिर कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। यह शिलाखंड भूरे रंग की है। मंदिर लगभग 6 फीट ऊंचे चबूतरे पर बना है। इसका गर्भगृह प्राचीन है, जिसे 80वीं शताब्दी के लगभग का माना जाता है। मंदिर तीन तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। एक तरफ है, करीब 22 हजार फीट ऊंचा केदारनाथ की पहाड़ियां, दूसरी तरफ 21 हजार 600 फीट ऊंचा खर्च कुंड और तीसरी तरफ है 22 हजार 700 फीट ऊंचा भरतकुंड।

केदारनाथ मंदिर न सिर्फ तीन पहाड़ बल्कि पांच नदियों मंदाकिनी, मधुगंगा, क्षीरगंगा, सरस्वती और स्वर्ण गौरी का संगम भी है। इन नदियों में से कुछ का अब अस्तित्व नहीं रहा, लेकिन अलकनंदा की सहायक मंदाकिनी आज भी मौजूद हैं।

आदि शंकराचार्य ने कराया जीर्णोद्धार

शिव के इस मंदिर को पत्थरों से कत्युई शैली में बनाया गया है। यहां के पुजारियों की मानें तो इस विशाल मंदिर का निर्माण पांडव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहां स्थित स्वयंभू शिवलंग अति प्राचीन है। सदियों बाद इस मंदिर का चीर्णोद्धार आदि शंकराचार्य ने करवाया था। उत्तराखंड देव भूमि या देवताओं की भूमि के रूप में भी प्रसिद्ध है। उत्तराखंड एक ऐसा स्थान है जो न केवल हिमालय की सुंदरता को समेटे हुए हैं, बल्कि यह एक खूबसूरत सांस्कृतिक सभ्यता को भी दर्शाता है। पर्यटन के लिहाज से उत्तराखंड राज्य पर्यटकों के लिए बहुत खास है।

प्राकृतिक सौंदर्य चमत्कार जैसा

केदारनाथ का शांत वातावरण भगवान के प्रेम में डूबे श्रद्धालु और प्राकृतिक सौंदर्य किसी चमत्कार से कम नहीं लगता है। मंदिर की खूबसूरत कलात्मक शैली, भक्तों की आस्थाएं, पर्वतों पर बिखरी रूईनुमान बर्फ, हसीन वादियों में तेज हवाओं के झौंके, मंदाकिनी नदी का तेज बहाव, कल-कल करता पानी का शोर मन को खुश कर देता है। शंकराचार्य ने यहां समाधि ली थी और तकरीबन 8वीं शताब्दी में गुरुजी शंकराचार्य केदारनाथ मंदिर आए थे। इस मंदिर के दर्शन के बाद उन्होंने यहीं समाधि ली थी। शंकराचार्य समाधि दर्शनीय है।

ठान लो तो सब आसान

केदारनाथ धाम यात्रा की जानकारी देते हुए आशी चौहान कहती हैं कि मुझे ट्रैकिंग करा बेहद पसंद है। मध्यप्रदेश पूरा देखने के बाद भारत घूमने की इच्छा लेकर ट्रेवलिंग की शुरुआत की। केदारनाथ जाना मेरे लिए किसी सपने से कम नहीं था। केदारनाथ यात्रा इतनी आसान नहीं है, लेकिन ठान लो तो आसान भी है।