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दान पेटी से मिले मन्नतों के पत्र, पढ़कर आप भी हो जाएंगे भावुक

-32 पेटियों में से अब तक 27 पेटियां खोली गईं

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khajrana ganesh mandir

इंदौर। हे भगवान गणेश, मेरे पिता की शराब छुड़ा दो, मेरा परिवार मुश्किल में है। मुझे पिता के स्वास्थ्य की भी चिंता है...। प्रथम पूज्य मेरी मम्मी की तबीतय ठीक कर दो...। भगवान मेरी जल्दी शादी करा दो...मेरा घर बसा दो...। भगवान अब तो मेरा मकान बनवा दो...। मेरी नौकरी लगा दो गणेशजी, तंगी सही नहीं जाती...।

इस तरह के प्रार्थना पत्र खजराना गणेश मंदिर की दान पेटियों से निकल रहे हैं। भक्तों ने दान पेटियों में बड़ी संख्या में अपनी मन्नतों के पत्र डाले हैँ। खजराना गणेश मंदिर के दान पेटियों की गिनती बुधवार से शुरू हुई, जो गुरुवार को भी जारी रही। 32 पेटियों में से 12 बुधवार को, वहीं 15 पेटियां गुरुवार को खोली गईं। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट और प्रबंधक प्रकाश दुबे ने बताया, दान की गिनती जारी है। शुक्रवार को नोट बैंक में जमा कराने के साथ अन्य पेटियां खोली जाएंगी। गुरुवार को रूद्राक्ष की माला, विदेशी मुद्रा, चांदी के स्वास्तिक निकले।

अब तक 50 लाख रुपए निकले

शहर में सबसे अधिक दान खजराना गणेश मंदिर में आता है। दो दिन में करीब 50 लाख रुपए नकद पेटियों से निकल चुका है। अभी और भी पेटियां खुलनी हैं। ऐसे में दान की राशि बढ़ेगी। दान पेटियों को सुबह सुरक्षा इंतजाम के बीच मंदिर कार्यालय पर लाकर खोला जा रहा है। कैमरों की निगरानी में पेटियों से दान की गिनती की जा रही है। जिला कोषालय, नगर निगम के 32 कर्मचारी गिनती कर रहे हैं।

खजराना गणेश मंदिर बांस की टोकरी में मिलेगा प्रसाद

वहीं अब मंदिर में कई बदलाव किए जा रहे हैं। खजराना मंदिर में गणेशजी का प्रसाद बांस की टोकरी में मिलेगा. यहां झंडे, अगरबत्ती और लड्डू के डिब्बे भी बदले जा रहे हैं. दरअसल मंदिर को प्लास्टिक मुक्त करने का प्रयास में ये बदलाव किए जा रहे हैं। सिंगल यूज प्लास्टिक पर रोक लगने के बाद इस काम में और तेजी आ गई है। एक अगस्त तक मंदिर परिसर को हर तरह के प्लास्टिक से मुक्त करने की तैयारी है। अब तक भक्तों को प्लास्टिक की टोकरी में ही माला व प्रसाद दिया जाता था। इसकी जगह प्रसाद के लिए अब बांस से बनी टोकरी का उपयोग किया जाएगा। प्रसाद के लड्डू भी अब गत्ते से बने पैकेट में दिए जाएंगे। सजावट में भी किसी भी तरह के प्लास्टिक सामान या थर्माकोल का उपयोग नहीं किया जाएगा। मंदिर और मंदिर परिसर में कपड़े के बने झंडे और बैनर ही लगाए जाएंगे। यहां तक कि झंडे की डंडी भी बांस की ही होगी।

अगरबत्ती भी प्लास्टिक की पैकिंग में ही मिलती थी। भक्त इन्हें जलाने के बाद पैकिंग कचरे में फेंक देते हैं। इस पर रोक लगाने के लिए अब अगरबत्ती भी खुली हुई ही दी जाएगी। विशेष बात यह है कि यहां भगवान को अर्पित होने वाले फूलों से ही अगरबत्ती भी बनाई जा रही है। वर्तमान में परिसर में करीब 600 किलो फूलों से रोज करीब 15 किलो अगरबत्ती व धूप बनाई जाती है।