14 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बर्थडे स्पेशल: किशोर दा का कॉलेज, यहां की टेबल पर सीखा तबला, पेड़ के नीचे बुने गीत

किशोर के चुलबुलेपन के गवाह हैं क्रिश्चियन कॉलेज के दरो-दीवार कॉलेज में आजादी के जश्न में रातभर गाए थे गीत, इमली के पेड़ के नीचे बैठकर बनाते थे धुन

3 min read
Google source verification

image

Amit Mandloi

Aug 05, 2017

इंदौर @रुखसाना मिर्जा. हरफनमौला कलाकार किशोर कुमार का आज जन्मदिन है। वे खंडवा से इंदौर के क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई करने भी आए थे। कॉलेज की दरों-दीवार में उनके चुलबुलेपन की यादें आज भी ताजा है।
14 अगस्त 1947 को रात 12 बजे जब देश आजाद हो रहा था तब शहर के क्रिश्चियन कॉलेज में भी आजादी का जश्न मनाया जा रहा था। कॉलेज के अंग्रेज प्राचार्य डॉ. एए स्कॉट ने रात को तिरंगा फहराया था और कॉलेज के स्टूडेंट्स ने किशोर कुमार के साथ जोश भरे वतनपरस्ती के तराने गाए थे। कॉलेज के ब्रांसन हॉल में जश्न सुबह होने तक चला था। किशोर कुमार उस वक्त फस्र्ट ईयर के स्टूडेंट थे।

IMAGE CREDIT: patrika
किशोर कुमार और उनके बड़े भाई अनूप कुमार ने 1946 में क्रिश्चियन कॉलेज में इंटरमिडिएट में एडमिशन लिया था। उसी साल इन दोनों भाइयों ने खंडवा के स्कूल से हाईस्कूल पास की थी। उस समय किशोर कुमार की उम्र लगभग 16 बरस थी। उनके पिता केएल गांगुली ने खंडवा से एक खत क्रिश्चियन कॉलेज के प्रिंसिपल के नाम लिखा था जिसमें कहा गया था कि वे उनके दो बेटों को कॉलेज में एडमिशन और होस्टल में रहने के लिए भेज रहे हैं। अंग्रेजी में लिखा वो खत आज भी कॉलेज के रिकॉर्ड में है। इस खत के साथ उन्होंने दोनों बेटों की हाईस्कूल की मार्कशीट और स्कूल की टीसी भी भेजी थीं। ये सारे कागजात भी कॉलेज के रिकॉर्ड में हैं।
स्टेज पर गाने में शर्माते थे
किशोर कुमार के क्लासमेट 90 वर्षीय मधुसूदन होलकर ने बताया कि किशोर कुमार अच्छा गाते थे, लेकिन स्टेज पर आने से शर्माते थे। वे पर्दे के पीछे गाते थे। कई बार उनके गाए गाने पर स्टेज पर कोई और एक्ट करता था। जब कॉलेज में आए तो सब उन्हें उस वक्त के स्टार अशोक कुमार के भाई के तौर पर पहचानते थे। 1948 में पढ़ाई बीच में छोड़ मुंबई चले गए थे।kishore kumar birthday
IMAGE CREDIT: patrika

झुमझुम झुमरू की धुन यहीं गुनगुनाई थी
फिल्म झुमरू का गाना 'मैं हूं झुमझुम झुमरूÓ की धुन किशोर कुमार ने क्रिश्चियन कॉलेज की मुख्य बिल्डिंग के पीछे इमली के पेड़ के नीचे बैठ कर बनाई थी। कॉलेज के इतिहास के प्रोफेसर डॉ. स्वरूप वाजपेयी ने बताया कि मैं 1962 में इस कॉलेज में आया था। उस वक्त जो प्रोफेसर थे उन्होंने किशोर कुमार को पढ़ाया था। उन्हीं में से एक प्रो. स्वर्गीय जयदेवप्रसाद दुबे बताया करते थे कि इमली के पेड़ के नीचे जो पत्थर की लंबी सीट बनी हुई है उसी पर किशोर कुमार दोस्तों के साथ बैठ कर धुन गुनगुनाया करते थे। कई साल बाद वही धुन उन्होंने फिल्म झुमरू में इस्तेमाल की। गौरतलब है कि झुमरू के संगीतकार भी किशोर कुमार ही थे। इसी पेड़ के नीचे वे योडलिंग किया करते थे, जो बाद में उनकी पहचान बनीं।

IMAGE CREDIT: patrika

क्लास में बजाया करते थे टेबल
किशोर कुमार अकसर क्लास में टेबल बजाय करते थे। एक दिन तो पॉलिटिकल साइंस के लैक्चर के दौरान भी उन्होंने टेबल बजा दी थी, लेकिन उन्हें तब डांट पड़ी थी। किशोर बहुत चुलबुले थे इसलिए कई बार स्ट्रिक्ट प्रोफेसर्स उन्हें अक्सर डांटते थे।
कैंटीन के काका का पांच रुपए बारह आने का उधार
प्रो. स्वरूप वाजपेयी ने बताया कि कॉलेज में कैंटीन और मेस चलाने वाले काका सत्तर के दशक तक जीवित रहे। काका के बच्चे नहीं थे, इसलिए वे छात्रों को बच्चों की तरह स्नेह करते थे। कई छात्रों का उधार चलता था। किशोर कुमार पर भी उनका पांच रुपए बारह आने का उधार था। ये रकम वे चुका नहीं पाए, लेकिन ये बात उनके दिमाग में रही। उन्होंने अपनी फिल्म 'चलती का नाम गाड़ीÓ के एक गाने में इस बात को मुखड़े के तौर पर लिया था।

IMAGE CREDIT: patrika