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चंपू ने दिया उद्योगपति को चकमा, 70 लाख लेकर भी नहीं दिए प्लॉट

ऑपरेशन क्लीन में सामने आया सैटेलाइट हिल्स का मामला

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चंपू ने दिया उद्योगपति को चकमा, 70 लाख लेकर भी नहीं दिए प्लॉट

चंपू ने दिया उद्योगपति को चकमा, 70 लाख लेकर भी नहीं दिए प्लॉट

इंदौर। ऑपरेशन क्लीन में भू-माफिया चंपू अजमेरा के एक के बाद एक कारनामे सामने आ रहे हैं। उसने एक उद्योगपति को भी चपत लगा दी। उन्होंने परिवार के लिए चार प्लॉट लिए थे, जिसके एवज में ७० लाख रुपए दिए थे। चंपू ने रुपए लेने के बाद न तो रजिस्ट्री करवाई और न प्लॉट दिए।

प्रदेश से माफिया राज खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री कमल नाथ ने मुहिम चला रखी है। इसके चलते इंदौर में ऑपरेशन क्लीन चलाया जा रहा है, जिसकी निगरानी खुद संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी कर रहे हैं। उनके निर्देश पर कलेक्टर लोकेश कुमार जाटव व उनकी टीम गृह निर्माण संस्था के घोटाले, सरकारी जमीन की खरीद-फरोख्त व कब्जा और अवैध कॉलोनी काटने वालों की जांच कर कार्रवाई कर रही है।

गृह निर्माण संस्थाओं के अलावा जिला प्रशासन को सबसे ज्यादा शिकायतें किसी की मिल रही हैं तो वह चंपू अजमेरा और चिराग शाह की हैं। चंपू से पीडि़तों का आंकड़ा सैकड़ा पार कर गया है। इस फेहरिस्त में एक उद्योगपति परिवार भी शामिल है। हेमंत नेमा, उनकी पत्नी बबीता और पीयूष ने एक शिकायत की है।

कहना है कि नारायण अंबिका इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रालि तर्फे रितेश उर्फ चंपू अजमेरा व उनकी पत्नी योगिता अजमेरा से २००८ में सैटेलाइट हिल्स में २७, २८, २१२ व ७२३ नंबर के चार प्लॉट लिए थे। तीन प्लॉट ३२०० वर्गफीट के थे तो एक १८ वर्गफीट का था। प्रत्येक बड़े प्लॉट के लिए १९ लाख २० हजार रुपए चुकाए गए तो छोटे प्लॉट के लिए १० लाख ८० हजार रुपए नेमा ने पालीवाल नगर स्थित घर पर जाकर दिए थे।

प्लॉटों के सारे पैसे १४ मई २००८ को चुका दिए गए थे, लेकिन आज तक उनकी रजिस्ट्री व कब्जा नहीं दिया गया। प्लॉट नहीं दे पाने की स्थिति में कीमत भी नहीं लौटाई जा रही है। नेमा का कहना है कि जब भी कहा जाता है तब वह टालमटोल करता है।

कॉलोनी में सैकड़ों लोग पीडि़त
चंपू ने बायपास में नायता मुंडला से लगी हुई सैटेलाइट हिल्स कॉलोनी की शुरुआत बड़े ही धूमधाम से की थी। उसका यह प्रोजेक्ट देखकर बड़ी संख्या में लोगों ने प्लॉट खरीद लिए थे। डायरी पर सारे प्लॉटों का खेल हुआ तो कुछ लोगों ने इक_े पैसे जमा करवा दिए, उन्हें रजिस्ट्री भी कर दी गई थी। करीब दो दर्जन लोगों के पास कॉलोनी की रजिस्ट्री है, वहीं डायरी लेकर घूमने वालों की फेहरिस्त सैकड़ों में है। इनमें हेमंत नेमा जैसे कई लोग हैं, जो पूरा पैसे दे चुके हैं।

बॉबी की करतूत, सर्वानंद नगर रहवासी संघ विरोध में उतरा

उद्योग की जमीन पर बसे सर्वानंद नगर के रहवासियों ने भी भूमाफिया बॉबी छाबड़ा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रशासन से शिकायत कर कई राज उजागर किए हैं। कहना है कि बॉबी और उनकी गैंग ने दो बार विकास शुल्क लिया, लेकिन अब तक कुछ नहीं करवाया। वहीं, सदस्यों को प्लॉट देने की बजाय उसने होटल व होस्टल माफियाओं को बेच दिए।

भंवरकुआं क्षेत्र स्थित सर्वानंद नगर को गड़बडिय़ों की खदान कहा जा सकता है। सर्वानंद नगर गृह निर्माण संस्था ने मास्टर प्लान में उद्योग के उपयोग की जमीन पर कॉलोनी तैयार कर दी। यहां तक तो ठीक था, पुराने सदस्यों को प्लॉट आवंटन नहीं करते हुए जमकर खेल किया। कुछ पुराने सदस्यों को प्लॉट का आवंटन हो गया था, जिस पर उन्होंने अवैध तौर पर मकान बनाकर रहना शुरू कर दिया ताकि उनके प्लॉट बचे रहें।
ऐसे ही करीब २७ परिवारों ने रहवासी संघ बना रखा है जिन्होंने भूमाफिया बॉबी छाबड़ा की शिकायत की, जिसमें कई राज उजागर किए। कहना है कि २० साल से वह रह रहे हैं। उन्हें संस्था से प्लॉट दिया गया था, लेकिन बाद में बॉबी छाबड़ा ने उस पर कब्जा कर लिया। संस्था पर कब्जा करते ही बॉबी और उसके गुर्गों ने दूसरी बार सभी प्लॉटधारियों से विकास शुल्क लिया। बाद में वैध सदस्यों को प्लॉट ना देते हुए विनोद कालरा, श्याम खत्री, पवन सुरजानी और ओपी सलुजा जैसे माफियाओं को दे दिए गए, जिन्होंने होस्टल व होटल बनाकर व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दीं।

दिखाए थे सपने
रहवासियों का कहना है कि छाबड़ा ने हमें कॉलोनी को वैध कराने का सपना दिखाया था। कहना था कि चारों तरफ गेट, सिक्योरिटी रूम, ३ गार्डन, सड़क पानी, बिजली व पैवर लगवाएंगे। इसके नाम पर पैसा इक_ा किया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। यहां तक कि कॉलोनी भी वैध नहीं हुई। बॉबी ने एक भाजपा नेता के साथ भी बैठक की थी। उनके कहने पर पैसे जमा कराए थे।

बेच खाया गार्डन और कुआं
कॉलोनी में पहले तीन गार्डन हुआ करते थे, जिसमें से अब दो ही बचे हैं। संस्था के कर्ताधर्ताओं ने एक गार्डन पर प्लॉट काटकर बेच दिए। इसके अलावा तीन कुएं थे, जिसमें से दो कुओं पर व्यावसायिक भवन बनकर तैयार हो गया है।