
Government buses प्रतिकात्मक फोटो (Photo Source - Patrika)
MP News: मध्यप्रदेश स्तर की होल्डिंग कंपनी में शामिल होने के लिए सिटी बस सेवा का सारा रिकॉर्ड हस्तांतरित होने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस (एआइसीटीएसएल) के हाथ में संभाग में बस संचालन का काम होगा जिसके कारण प्रक्रिया तेज की गई है।
संचालन के लिए बोर्ड बना दिया गया है, जिसमें सारे वरिष्ठ अफसर शामिल हैं। इनकी निगरानी में सुरक्षित, सुगम व सस्ती बस सेवा शुरू करने का दावा है। हालांकि, अनुबंध के बाद जून-जुलाई में ही संचालन शुरू होने की स्थिति बनेगी। सरकारी बस सेवा के लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।
अधिकारियों के मुताबिक, सुगम, सुरक्षित व सस्ता लोक परिवहन देने के लिए तैयारी चल रही है। कंपनी इंटर सिटी सर्विस, जिसमें इंदौर से उज्जैन, धार-पीथमपुर, देवास, बुरहानपुर, खंडवा- खरगोन, हरदा, भोपाल के लिए बसें चलाने के साथ इंदौर से 25 किलोमीटर से ज्यादा के स्थान यानी महू, देपालपुर, हातोद के साथ ही अन्य ग्रामीण रूटों पर चलाई जाएगी। करीब 30 से ज्यादा नए रूट जुड़ेंगे। यह ऐसे स्थान है जहां पर्याप्तबस सुविधा नहीं है, है भी तो बहुत खराब और मनमानी वसूली की जाती है। अप्रेल में पूरा प्लान सामने आएगा जिसके तहत निजी बस ऑपरेटरों की बसों को रेवेन्यू मॉडल पर अनुबंधित किया जाएगा। दावा है कि यात्रियों को सस्ता व सुरक्षित परिवहन मिलेगा।
मप्र यात्री परिवहन व इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के अधीन कई कंपनी बनाई है, जो सरकारी बसों का संचालन करेंगी। इंदौर रीजन की परिवहन सेवा की जिम्मेदारी एआइसीटीएसएल के हाथ में होगी। भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, सागर और रीवा में अलग-अलग कंपनियां भी काम करेंगी। कंपनी का सारा रिकॉर्ड हस्तांतरित किया जा रहा है। इसके मुख्य अधिकारी संभागायुक्त रहेंगे। बोर्ड में कलेक्टर, निगमायुक्त, एआइसीएसएल के सीइओ को भी शामिल किया गया है।
परिवहन कंपनी के लिए मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है। परिवहन कंपनी के शहर में 14 डिपो होंगे। नायता मुंडला व कुमेड़ी आइएसबीटी से बसों का संचालन होगा। कंपनी के पास 14 डिपो हैं। कुछ बढ़ाए भी जाएंगे। एआइ आधारित डिजिटल निगरानी सिस्टम रहेगा, जिसमें टिकट बुकिंग के साथ ही बसों की जीपीएस आधारित लोकेशन रहेगी, आधुनिक कंट्रोल रूम से निगरानी की टीम तैनात होगी। पूर्व पुलिस व सेना के अधिकारी-कर्मचारी तैनात किए जाएंगे।
पीपीपी मॉडल पर बसें चलेंगी, ऑपरेटर को 95 प्रतिशत तो कंपनी को 5 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा। एक रंग की बसें चलेंगी, आइटीएमएस सिस्टम भी लागू रहेगा। बसों में फर्स्ट एड बाक्स, कैमरे, पैनिक बटन रहेंगे। कर्मचारियों का वेरिफिकेशन होगा, गलती स्वीकार नहीं होगी। ऑपरेटर ने लापरवाही की तो चेतावनी के बाद बस को ऑफ रोड कर दिया जाएगा। बसों के अनुबंध, परमिट के बाद संचालन जून-जुलाई से शुरू होने की संभावना है।
Published on:
11 Feb 2026 01:32 pm
