मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ब्लॉस्ट में मारे गए लोगों के परिजन को सहायिका व प्राथमिक विघालय में चपरासी पद पर अस्थायी नौकरी दी थी, लेकिन बाद में कई को बिना कारण बाहर कर दिया तो कई को वेतन के लाले पड़ गए। इस तरह पीडि़त परिवार धोखे का शिकार हो गए। विस्फोट में जो घायल हुए थे। वे अभी तक काम करने लायक नहीं हो पाए। सरकारी उपेक्षा के कारण वे निराश है। उनका कहना है कि कोई सरकारी अधिकारी और नेता हालचाल जानने के लिए नहीं आया कि वे कैसे अपना जीवनयापन कर रहे हैं। घटना के बाद सीएम अपने काफिले के साथ ग्राम झोसर, मातापाड़ा , कोदली, उन्नई, नाहरपुरा , असालिया, अमरगढ़, बामनिया , करड़ावद, बरवेट, हमीरगढ़, रायपुरिया और रूपगढ़ जैसे कई ग्रामों में मृतकों के परिवार को सांत्वना देने गए थे। वहां उन्होंने पीडि़त परिजन को कोई चिंता न करने का बोलकर भरपूर सरकारी मदद देने का आश्वासन दिया था। परंतु उन परिवारों को कोई मदद नहीं मिल पाई और सीएम का आश्वासन कोरा रहा गया।