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पेटलावद: लाशों का लगा था अंबार, धमाके में लोगों के उड़ गए थे चीथड़े

 12 सितंबर 2015 को थांदला रोड स्थित एक मकान में अवैध रूप से रखे बारूद व रासायनिक खाद में हुए विस्फोट में  75 से अधिक जाने चली गई व कई लोग घायल हुए थे। 

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Shruti Agrawal

Sep 12, 2016

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गोपाल राठौर@ पेटलावद. ब्लास्ट की पहली बरसी के पूर्व नगर में अजीब सा वातावरण बना हुआ है। पिछले वर्ष 12 सितंबर को थांदला रोड स्थित एक मकान में अवैध रूप से रखे बारूद व रासायनिक खाद में हुए विस्फोट में 75 से अधिक जाने चली गई व कई लोग घायल हुए थे।

घायलों के इलाज व मृतकों के परिवार को सहायता पहुंचाने के कई वायदे शासन-प्रशासन ने किए, लेकिन कई वादे अधूरे रह गए। मुख्य आरोपित राजेंद्र कांसवा के मारे जाने व जीवित होने की चर्चाएं चल रही है। हालांकि पुलिस ने पहले ही डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट के आधार पर राजेंद्र कांसवा को मृत घोषित कर दिया है।

आरोपित का परिवार भूमिगत: आरोपित राजेंद्र कांसवा की पत्नी अपने बच्चों और भाइयों के परिवार के साथ घरों और दुकानों पर ताले लगाकर अन्यत्र चली गई। बताते हैं कि लोगों के गुस्से को देखते हुए ऐहतियातन कदम उठाया गया। बीते कुछ महीनों पूर्व नगर परिषद ने तहसील कार्यालय के सामने श्रद्धांजलि स्मारक बनाने का निर्णय लिया था। इस पर कई ने आपत्ति ली। उनका कहना था कि श्रद्धांजलि चौक घटना स्थल के समीप चौराहे पर ही बनना चाहिए। इसके बाद से प्रशासन अनिर्णय की स्थिति में है।

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घोषणाएं अधूरी : हादसे के बाद मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री ने ब्लास्ट पीडि़तों को कई तरह की मदद उपलब्ध कराने की घोषणा की थी। कई सरकारी योजनाओं का लाभ देने की बातें भी की थी। परंतु ये घोषणाएं अधूरी ही रह गईं। वहीं समीप के ग्राम के आदिवासी परिवारों को मकान, खेती तथा अन्य कार्यों में सरकारी योजनाओं का लाभ देने की घोषणाएं की थी। परंतु उनमें से अधिकांश अधूरी हैं। कई लोग योजनाओं का लाभ लेने के लिए कलेक्टोरेट के चक्कर लगाते हुए थक चुके हैं ।

सोशल मीडिया पर बंद की अपील : सोशल मीडिया पर 12 सितंबर को नगर बंद की अपील की गई। इसके अलावा रैली के रूप में शहीद स्मारक बनाने के लिए प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की जानकारी वायरल होती रही। इस बीच नगर के व्यापारी भी बंद कितने बजे तक रहेगा। यह सवाल लोगों से पूछते रहे और यह जानकारी प्राप्त करते रहे कि बंद का आह्वान किसके द्वारा किया गया है। उधर देर शाम कलेक्टर आशीष सक्सेना और एसपी संजय तिवारी पेटलावद पहुंचे और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।

मृतकों के परिजनों को नौकरी से निकाला
मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ब्लॉस्ट में मारे गए लोगों के परिजन को सहायिका व प्राथमिक विघालय में चपरासी पद पर अस्थायी नौकरी दी थी, लेकिन बाद में कई को बिना कारण बाहर कर दिया तो कई को वेतन के लाले पड़ गए। इस तरह पीडि़त परिवार धोखे का शिकार हो गए। विस्फोट में जो घायल हुए थे। वे अभी तक काम करने लायक नहीं हो पाए। सरकारी उपेक्षा के कारण वे निराश है। उनका कहना है कि कोई सरकारी अधिकारी और नेता हालचाल जानने के लिए नहीं आया कि वे कैसे अपना जीवनयापन कर रहे हैं। घटना के बाद सीएम अपने काफिले के साथ ग्राम झोसर, मातापाड़ा , कोदली, उन्नई, नाहरपुरा , असालिया, अमरगढ़, बामनिया , करड़ावद, बरवेट, हमीरगढ़, रायपुरिया और रूपगढ़ जैसे कई ग्रामों में मृतकों के परिवार को सांत्वना देने गए थे। वहां उन्होंने पीडि़त परिजन को कोई चिंता न करने का बोलकर भरपूर सरकारी मदद देने का आश्वासन दिया था। परंतु उन परिवारों को कोई मदद नहीं मिल पाई और सीएम का आश्वासन कोरा रहा गया।

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( धमाके की यादें: आज भी उसी शक्ल में है गोदाम )
चौक को लेकर असमंजस :
घटनास्थल के समीप तिराहे पर भीड़ ने अंहिसा सर्किल तोड़ कर र्इंटों से नया निर्माण करते हुए श्रद्धांजलि चौक का नाम दे दिया। अहिंसा सर्किल निर्माण जैन समाज ने करवाया था। प्रशासन का कहना है कि नियमानुसार कोई अनुमति नहीं ली गई। अब जैन समाज अपना दावा जता रहा है। इस बारे में जैन समाज ने एक ज्ञापन दिया है। दूसरी तरफ जो लोग घटना के बाद उस स्थान पर श्रद्धांजलि चौक बनाने के पक्षधर थे। वे अब भी मांग पर अड़े हैं, लेकिन कोई भी खुलकर सामने नहीं आ रहा। इस स्थिति में प्रशासन ने भी सतर्कता बढ़ा दी है तथा उससे लगे क्षेत्र में पुलिस बल तैनात किया है। दूसरी तरफ घटना स्थल के आसपास श्रद्धांजलि देने वाले संदेश के होर्डिंग्स लगाए गए हैं, जिन्हें आने-जाने वाले रुककर देख रहे हैं।

ऐसे शमशान में बदला था पेटलावद का चौक-
आम सुबह की तरह पेटलावद 12 सितंबर 2015 को पेटलावद का श्रद्धांजली चौक ( हादसे के बाद मिला नया नाम) आमलोगों और बच्चों की आवाजाही से गुलजार था। तभी धमाकों की तेज आवाज हुई और पूरा चौक खून, तड़पते लोग और लाशों से भर गया।

पहला धमाका- 12 सितंबर शनिवार की मनहूस सुबह 8 बजकर 18 मिनिट पर पहला धमाका हुआ। लगा होटल का कोई सिलेंडर फटा है। नुकसान ज्यादा नहीं था लेकिन आवाज सुनकर लोग होटल के पास जमा हो गए।

दूसरा धमाकाः अभी लोग समझ ही पाते कि धमाका किस चीज में हुआ कि सिलेंडर ब्लॉस्ट की चिंगारी बगल के यूरिया गोदाम में पहुंच गई। राजेंद्र कांसवा के इस गोदाम में अवैध रूप से डेटोनेटर औऱ जिलेटिन की छड़े भी रखी थीं। इससे बड़ा धमाका हुआ और मौजूद भीड़ चपेट में आ गई। धमाके के बाद पूरी चौक में लाशे बिछी थी। पता चला इस धमाके ने 78 लोगों को मौत की नींद सुला दिया।

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(पत्रिका की मौत के अवैध कारोबार के खिलाफ मुहिम )

चश्मदीदों ने क्या देखा:
1: जब पलटकर देखा बेटा मर चुका था-
सूनी आंखों से आसमान ताकते हुए पुष्कर पडियार बताते हैं मैं और मेरा बेटा रवि मजदूरी के लिए निकले थे। हम दोनों होटल के पास खड़े थे। खाद-बीज की दुकान से स्पार्किंग के धमाके सी आवाज आई। दुकान का शटर बंद था। थोड़ी देर में भीड़ जमा हो गई। मैंने बेटे से कहा चल, काम पर देर हो जाएगी। पलट कर देखा तो जोरदार धमाका हुआ। धमाके का बारूद और धुंआ छटा तो देखा मेरा बेटा मर चुका था। बुढ़ापे की लाठी मेरे सामने खून से लथपथ पड़ी थी।

2: भाई-बहन की मौत, देवरानी-जेठानी की आंखे खराब-
अहमदाबाद के शांतिलाल बोघरा मां की अस्थियां विसर्जित करने उज्जैन जा रहे थे। रास्ते में होटल पड़ा, तो नाश्ते के लिए रुक गए। वहीं धमाका हुआ। शांतिलाल और बहन भानु की मौत हो गई। देवरानी-जेठानी बुरी तरह घायल हो गए। बारूद आंख में जाने के कारण उनकी आंखे चली गईं।

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यू चपेट में आए स्कूली बच्चे-
सेठिया रेस्टोरेंट पर स्कूली बच्चे रोज की तरह हादसे के दिन भी नाश्ता करने पहुंचे थे। जिस समय विस्फोट हुआ उस समय वहां एक दर्जन से ज्यादा बच्चे मौजूद थे। किसी के हाथ में नाश्ते की प्लेट थी तो कोई इंतजार कर रहा था। तभी हादसा हो गया। मासूमों को भागने का मौका भी नहीं मिला। चंद मिनटों में वहां लाशों का अंबार लग गया। हाजसे से बस स्टैंड की चहल-पहल चीख-चीत्कार में बदल गई।

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