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इंदौर में पहली बार लाइव लिवर ट्रांसप्लांट

शेल्बी अस्पताल में शुरू हुआ लिवर डीसीज व ट्रांसप्लांट सेंटर

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इंदौर. इंदौर में ब्रेन डेड मरीज के लीवर, हार्ट, किडनी ट्रांसप्लांट के बाद लाइव लिवर ट्रांसप्लांट की सुविधा शेल्बी हॉस्पिटल में शुरू की गई है। मरीज को जीवित व्यक्ति लिवर डोनेट कर पाएगा। इसके लिए यहां लिवर डीसीज व ट्रांसप्लांट सेंटर शुरू किया है।शुक्रवार को अहमदाबाद के बाद इंदौर स्थित शेल्बी हॉस्पिटल में भी इस सेंटर का उद्घाटन प्रसिद्ध ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ आनंद ने किया। उन्होंने बताया, मप्र में लिवर ट्रांसप्लांट बहुत कम होते हैं। मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट के लिए मुंबई, दिल्ली और चैन्नई जैसे बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है। शहर में बीते ३६ माह में ३७ ऑर्गन डोनेशन हुए हैं, लेकिन इस साल चार मरीजों को लिवर ट्रांसप्लांट हो पाए। वेटिंग लिस्ट की बात की जाए ६० से ७० मरीज इंतजार में हैं। हर साल यहां १०० से १५० मरीजों को ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। ऐसे में लाइव ट्रांसप्लांट मरीजों को नया जीवन देने में कारगर है। ०.३ फीसदी रिस्क डोनर कोडॉ. खखार ने बताया, लाइव लीवर ट्रांसप्लांट बहुत ही मुश्किल सर्जरी है, जिसमें डोनर की सर्जरी कर राइट साइड का 60 फीसदी या लेफ्ट साइड का ४० फीसदी लीवर निकाला जाता है और दूसरे बीमार मरीज में ट्रांसप्लांट किया जाता है। व्यस्क व्यक्ति का ७५ फीसदी हिस्सा निकाला जा सकता है। बच्चों के मामले में लेफ्ट साइड का हिस्सा निकाला जाता है। इसमें सबसे बड़ा चैलेंज यह है कि डोनर को कोई नुकसान नहीं हो। लिवर का हिस्सा दान करने के बाद वह दोबारा विकसित हो जाता है। यह सर्जरी 12 से 13 घंटे की है, जिसमें एक्सपर्ट की जरूरत होती है। डोनर के लिए सर्जरी में ०.३ फीसदी रिस्क ही रहती है। अस्पताल में डॉ. खखार के साथ डॉ. विनय कुमारन, डॉ. भाविन वसावद, डॉ. हार्दिक पटेल और डॉ. विनीत गौतम की टीम सर्जरी करेगी। ब्रेन डेड मरीज की किडऩी ट्रांसप्लांट की तरह इस सर्जरी में भी १८ से २० लाख रुपए का खर्च होता है। अस्पताल में किडनी, लिवर के बाद लंग्स व हार्ट ट्रांसप्लांट की सुविधा भी शुरू की जा रही है। शराब के साथ खराब जीवन शैली बन रही वजहएक्सपट्र्स ने बताया, आमतौर पर लिवर खराब होने के कारण हेपेटाइटिस बी और सी लिवर सिरहोसिस और कैंसर होते हैं। आजकल गंभीर लीवर संबंधी बीमारियों के पीछे नॉन अल्कोहोलिक स्टीटो-हेपटाइटिस भी प्रमुख कारण बन चुका है। डाइबिटीज में सही देखभाल न करने और मोटापे के कारण भी फैटी लिवर की समस्या हो सकती है। शराब का सेवन लिवर संबंधी बीमारियों का सिर्फ एक कारण है, आजकल हम अनहेल्दी डाइट ले रहे हैं और एक्सरसाइज से दूरी भी बीमारियों को न्योता देती है। यदि फैटी लिवर की समस्या का समय रहते इलाज न किया जाए तो यह लवर सिहोसिस या कैंसर का रूप भी ले सकती है। खाने में कार्बोहाइड्रेड की मात्रा ज्यादा और प्रोटिन कम होने से भी खतरा बढ़ता है। १० फीसदी आबादी पीडि़तडॉ.खखार ने बताया, शराब के अधिक सेवन के कारण होने वाली लिवर की बीमारियां कम उम्र में मौत का सबसे बड़ा कारण बनती जा रही है। देश में औसतन १० फीसदी आबादी लिवर की बीमारियों से प्रभावित है। पांच फीसदी मरीज शराब के कारण शिकार होते हैं। बचे पांच फीसदी में तीन फीसदी हेपटाइटिस बी व सी और बचे अन्य इंफेक्शन के कारण शिकार होते हैं। आयुर्वेदिक व होम्योपैथी दवाओं के बारे में उन्होंने कहा, इससे फायदा कम, नुकसान ज्यादा होता है। आयुर्वेदिक दवाओं में कुछ टॉक्सिक होने के कारण मरीज की हालत और भी बिगड़ जाती है।