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न टैक्स का बोझ न तरक्की पर ब्रेक, गांव से शहर तक बिछेगा खुशहाली का जाल

madhya pradesh budget: लाड़ली को दुलार, इन्फ्रा को गियर और उद्योगों को खुला आसमान...। 4.38 लाख करोड़ के 'महा-बजट'। बजट का दीर्घकालिक प्रभाव प्रदेश की विकास संरचना को बहुआयामी रूप से मजबूत करेगा।

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इंदौर

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Manish Geete

Feb 19, 2026

himanshu rai

आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो. हिमांशु राय की नजर में कैसा था एमपी का बजट। विजुअल एआई जनरेटेड।

प्रो. हिमांशु राय, निदेशक, आईआईएम इंदौर

madhya pradesh budget: मध्य प्रदेश का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट राज्य की अर्थव्यवस्था के आत्मविश्वास और सामाजिक प्रतिबद्धता का संतुलित दस्तावेज बनकर सामने आया है। 4.38 लाख करोड़ रुपए का यह अब तक का सबसे बड़ा बजट विकास की नई दिशा तय करता है। सरकार ने कोई नया कर नहीं लगाया, जिससे आम नागरिकों और उद्योगों दोनों को राहत का संदेश मिला। बजट का केंद्र बिंदु 'प्रत्यक्ष लाभ आधारित सामाजिक सशक्तीकरण' है।

उदाहरण के लिए, लाड़ली बहना योजना के लिए 23,882 करोड़ रुपए का प्रावधान महिलाओं की आय सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने का बड़ा माध्यम बनेगा। कृषि को मजबूत करने के लिए 5,500 करोड़ रुपए का प्रावधान और सौर सिंचाई पंपों की योजना किसानों की लागत घटाकर आय बढ़ाने की रणनीति को दर्शाता है। स्वास्थ्य क्षेत्र में लगभग 23,700 करोड़ रुपए का निवेश नए मेडिकल कॉलेज और अस्पतालों के माध्यम से मानव पूंजी निर्माण पर सरकार का फोकस दिखाता है।

प्रदेश को मजबूत करेगा

40,000 करोड़ रुपए ग्रामीण विकास, 12,690 करोड़ रुपए सड़क निर्माण और 4,454 करोड़ रुपए जल जीवन मिशन के लिए रखे गए हैं, जो बुनियादी ढांचे को विकास का इंजन बनाते हैं। सरकार ने शिक्षक और पुलिस भर्ती, आदिवासी वर्ग के लिए 47,429 करोड़ रुपए और बुनियादी सेवाओं पर निवेश के माध्यम से इन अपेक्षाओं को नीति स्तर पर संबोधित किया है। बजट का दीर्घकालिक प्रभाव प्रदेश की विकास संरचना को बहुआयामी रूप से मजबूत करेगा।

आय वृद्धि से उपभोग बढ़ेगा

ग्रामीण क्षेत्रों में आय वृद्धि से उपभोग बढ़ेगा। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को नई मांग मिलेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा। सड़क, जल और स्वास्थ्य ढांचे में निवेश लॉजिस्टिक लागत घटाकर राज्य को निवेश के लिए आकर्षक बनाएगा। महिलाओं के हाथ में सीधे संसाधन आने से सामाजिक सूचकांकों, जैसे पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होगा, जिसका सकारात्मक असर मानव विकास सूचकांक पर पड़ेगा।


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