
परिचय से शुरू हुई 50 जोड़ों के परिणय की बात
तीन दिवसीय माहेश्वरी परिचय सम्मेलन
परिचय से शुरू हुई 50 जोड़ों के परिणय की बात
इंदौर. अभिभावकों के लिए विवाह योग्य युवक-युवतियों के लिए जीवनसाथी चयन में दिनोंदिन चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। इसी कारण परिचय सम्मेलन आज की जरूरत बन गया है। शनिवार को ये विचार पश्चिमी मध्यप्रदेश प्रादेशिक माहेश्वरी सभा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय परिचय सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि श्याम सुंदर सोनी (नागपुर) ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा, परिचय सम्मेलन से समय व पैसों की कम बर्बादी होती है। गुमाश्ता नगर स्थित दस्तूर गार्डन में आयोजित सम्मेलन में उन्होंने सभी प्रत्याशियों को समन्वय बढ़ाने का संदेश दिया। देश-विदेश के उच्च शिक्षित युवक-युवतियों की 1500 से अधिक प्रविष्टियां मिली। मेल-मुलाकात के बाद शाम तक 50 रिश्तों पर चर्चा शुरू हुई।
मालवी पगड़ी पहनाकर किया सम्मान
पश्चिमी मध्यप्रदेश प्रादेशिक माहेश्वरी महासभा एवं श्री महेश सामाजिक एवं पारमार्थिक संस्था की मेजबानी में आयोजित परिचय सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथियों ने भगवान महेश की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन से किया। परिचय सम्मेलन के मुख्य संयोजक डॉ रवींद्र राठी, अजय सारड़ा एवं गोपालदास राठी ने अतिथियों का स्वागत किया। मोहनलाल राठी, शरदजी गट्टानी, त्रिभुवनदास काबरा, श्यामसुंदर राठी, लखनलाल नागोरी एवं जगदीशचंद्र सोमानी ने अपने विचार व्यक्त किए। इस दौरान बहुरंगी स्मारिका परिचय से परिणय का विमोचन भी किया गया। उत्कृष्ट सामाजिक कार्यों के लिए माणकचंद लड्ढा, रामरतन लड्ढा एवं गीतादेवी लड्ढा का मालवी पगड़ी पहनाकर सम्मान किया गया ।
व्यापार में बदला संबंध करना
अभा माहेश्वरी महासभा सभापति श्यामसुंदर सोनी ने कहा, अभिभावक बहू के लिए संयुक्तपरिवार की लडक़ी को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन अपनी लडक़ी को एकल परिवार में देना चाहते हैं। एकल परिवार की मानसिकता बदलना जरूरी है। वर्तमान दौर में संबंध तय करना भी व्यापार बन गया है। कई संगठन, संस्थाए इस कार्य में शामिल हो गए हैं। शादी के नाम पर सौदेबाजी हो रही है, जिस पर रोक लगाना चाहिए। समाज संगठित होगा तो राजनीतिक पार्टियां घर बैठे टिकट देने आएंगी।
समन्वय से होगी जिदंगी की राह आसान
इस मौके पर राम अवतार जाजू ने कहा, परिचय से परिणय के सफर में विश्वास और समन्वय रूपी चक्के जिदंगी की राह आसान करते हैं। वैचारिक मतभेद को हावी न होने दें, यह संबंध विच्छेद का सबसे बड़ा कारण बन जाता है। वर्तमान में युवाओं के बीच ऐसी समस्याएं देखने को मिल रही है। बुजुर्गों से सीख लेकर रिश्तों को समन्वय की नींव पर आगे बढ़ाएंगे, तभी उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला रख सकेंगे।
Published on:
21 Oct 2018 04:16 am
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