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भीख मांगना छोड़कर बना रहे ‘पेपर बैग’ और ‘कपड़े के थैले’, हर दिन बेच रहे 500 बैग

इंदौर। पॉलीथिन के बढ़ते इस्तेमाल से प्रदूषण चरम पर पहुंच गया है। यह हमारे पर्यावरण को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। प्रदूषण को कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार ने सिंगल यूज प्लास्टिक पर बैन लगा दिया है। इसके बाद से ही पेपर बैग और कपड़े के थैलों की डिमांड बढ़ गई है।

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paper bags

इस डिमांड को पूरा करने में कई लोगों को रोजगार भी मिला है। खास बात तो ये है कि शहर के कई भिक्षुक भिक्षावृत्ति छोड़कर पेपर बैग बनाने का काम कर रहे है और पैसे कमाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। वहीं, पेपर आर्ट का काम भी हो रहा है।

पेपर बैग बनाकर बड़ा संदेश

परदेशीपुरा स्थित भिक्षुक पूनवार्स केंद्र पर रेसक्यू कर लाए गए भिक्षुक हितग्राहियों को आय के लिए अलग-अलग कामों की ट्रेनिंग दी जा रही है। इनमें से करीब 30 भिक्षुक हितग्राहियों को पेपर बैग बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। अब ये लोग हर दिन बैग बनाकर कमाई कर रहे है। इससे इनके मन से भिक्षावृत्ति करने का भाव भी खत्म हो गया है और अपने काम से पर्यावरण बचाने का संदेश भी दे रहे हैं।

हर दिन बेच रहे 500 बैग

पेपर बैग बनाने की शुरुआत करीब 9 महीने पहले हुई थी। शुरुआत में बैग बनाने की क्वांटिटी भी कम थी और खरीददार भी नहीं थे। आज ये लोग हर दिन 500 छोटे-बड़े बैग बना रहे हैं। सबसे खास बात तो यह है कि ये सारे बैग एक दिन में बिक भी जाते है। दुकानदार, महिला मंडल और कई संगठनों से इन्हें पेपर बैग के लिए ऑर्डर मिलने लगे है। इन बैग की कीमत 3 से 15 रूपए तक होती है।

हम लोग भिक्षुकों को ऐसी चीजें बनाने का प्रशिक्षण देते है, जो डेली लाइफ में काम आती हों। पेपर बैग के अलावा अगरबत्ती, फूल बत्ती, पोहा, परमल जैसी चीजें वे बना रहे हैं। पेपर बैग की मांग बढ़ी है। बड़ी संख्या में ऑर्डर भी मिलने लगे हैं। हमारी कोशिश है कि इन कामों के लिए इन्हें मशीन उपलब्ध कराई जाए, ताकि प्रोडक्शन बढ़ने के साथ ही फिनिशिंग भी आएगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ जाएंगे। - रूपाली जैन, संचालक, भिक्षुक पुनर्वास केंद्र

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