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जंगल का राजा ने लुभाया सबको, कैसे जानिए

सानंद फुलोरा में मराठी बाल नाट्य ‘राजा सिंह’ का मंचन

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marathi child drama raja singh play

विकलांग बच्चों ने किया ऐसा डांस की देखते रह गए लोग - देखें जबलपुर न्यूज़ बुलेटिन

इंदौर. मराठी सांस्कृतिक संस्था सानंद के उपक्रम फुलोरा के तहत रविवार शाम बच्चों के लिए नाटक खेला गया। इसमें ज्यादातर कलाकार बच्चे ही थे। इस मराठी बाल नाट्य ‘राजा सिंह’ को रत्नागिरि की संस्था अहन क्रिएशंस ने पेश किया। विवेक साठे के लिखे नाटक का निर्देशन केतन क्षीरसागर ने किया। नाटक का परिदृश्य जंगल और मुख्य पात्र भी वन्य पशु-पक्षी हैं, लेकिन उनके जरिए मनुष्य का व्यवहार दर्शाने की कोशिश की गई। नाटक १७ गीतों और नृत्यों के जरिए बच्चों के लिए सुखद और मनोरंजक प्रस्तुति बन गया।

नाटक के मुख्य किरदार दो शेर चांडाल सिंह और राजा सिंह हैं। चांडाल सिंह दुष्ट शेर है, पर उसे वरदान मिला हुआ है कि वो जब चाहे मनुष्य रूप में आ सकता है। इसका फायदा उठाकर वह सभी पर अत्याचार करता है। छलकपट से राजा सिंह के राज्य पर कब्जा कर लेता है। सिंह राजा सारे पशु-पक्षियों को एकजुट करता है। ये सब मिलकर चांडाल सिंह को अपदस्थ करते हैं। सिंह राजा युक्तिपूर्ण ढंग से काम कर हर प्राणी को उसकी क्षमता के अनुसार काम देता है। हाथी के बल का उपयोग खूंखार प्राणियों को हराने में किया जाता है तो चींटियों का दुश्मन को परेशान करने में। चांडाल शेर के किरदार में स्वानंद देसाई और सिंह राजा के रूप में सागर पाटनकर ने प्रभावित किया। चांडाल राजा के मनुष्य रूपों में ऋषिकेश शिंदे, दीप्ति कान्विंदे और समर्थ पवार थे। नाटक के ५५ पात्रों में ४० बच्चे थे।

पर्यावरण बचाने का संदेश
नाटक में जंगल और पानी बचाने के संदेश हैं। जब हाथी नहाते हुए खेलता और मस्ती करता है तो छोटे प्राणी गीत गाकर उसे पानी को संभालकर खर्च करने का संदेश देते हैं। इसी तरह हरियाली बचाने, ईष्र्या, छल आदि से दूर रहने की बात भी रोचक प्रसंगों के जरिए कही गई है, ताकि नाटक उपदेशात्मक न लगे। बच्चों के लिए नाटक को कलरफुल रखा गया। एक गीत बच्चों की जुबान पर भी चढ़ गया, हकूना मटाटा टेंशन ला टाटा जी ले तू बेटा...।