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यह खाते थे छत्रपति और पेशवा, अब इंदौरियों की बना पसंद

पूरनपोली के साथ परोसते हैं मसाला दूध झंका भाकर, भरित भाकर और मसाला भात व कढ़ी लोगों को आ रहा खूब रास

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marathi food in indore

लखन शर्मा, इंदौर।

शहर में अब तक पंजाबी, गुजराती, राजस्थानी और मालवीय व्यंजन आसानी से कई स्थानों पर मिल जाते थे। लेकिन तीन माह पहले शहर में एक मराठी व्यंजनों से सराबोर रेस्टॉरेंट खुला जो सिर्फ तीन माह में ही इतना प्रसिद्ध हो गया की शहर तो ठीक शहर के आसपास से भी लोग यहां पहुंचने लगे हैं। लजीज लुत्फ में आज हम आपको उस रेस्टॉरेंट पर ले जा रहे हैं जहां मराठी परिवारों में घरों में बनने वाले व्यंजन यहां लोगों को परोसे जा रहे हैं और खूब भा रहे हैं।

होलकर स्टेट के निवास इंदौर में तीन माह पहले दो महिलाओं ने अपने परिवार की ही अन्य महिलाओं को साथ लेकर रंग मराठी नाम से पुराने आरटीओ रोड़ पर एक रेस्टॉरेंट की शुरूआत की। इस रेस्टॉरेंट पर वह व्यंजन रखे गए जो महाराष्ट्र में लोकप्रिय हैं और मराठी परिवारों के घरों में बनाए जाते हैं। चूंकि मराठी परिवार खानपान के खासे शौकीन होते हैं, जिसके चलते एसे ढेरों व्यंजन हैं जो परिवार की महिलाओं द्वारा ही इजात किए गए हैं। अपनी एमए की पढ़ाई पुरी कर चुकी मेघा थिटे और आकांक्षा आनंद द्वारा खोला गया यह रेस्टॉरेट इन दिनों हर किसी की जुबां पर है।

- पूरनपोली के साथ परोसते हैं मसाला दूध
यहां पहुंचने के बाद जब आप एक या दो व्यंजन लेते हैं तो उन्हे खाने के बाद अन्य व्यंजनों की तरफ एकाएक ही जी ललचाने लगता है। इसका कारण है ठेठ मराठी स्वाद। यहां परोसे जाने वाले व्यंजनों में पूरनपोली के साथ मसाला दूध व आम्टी दी जाती है। अब तक शहर में एक भी एसा स्थान नहीं था जहां पूरनपोली मिलती हो वह भी ओरिजनल टेस्ट वाली। इसके साथ ही यहां, मटकला कढ़ी भात, दाल बाटी जिसमें फ्राईड बाटी दी जाती है, मिसल पाव, दशमी, पूरी भाजी, थिकट पूरी सहित अन्य स्नेक्स दिए जाते हैं। इसके साथ ही विशेष रूप से मराठी थाली तैयार की गई है जिसमें छत्रपति थाली, पेशवाई थाली दी जाती है। इसके साथ ही झंका भाकर, भरित भाकर और मसाला भात व कढ़ी लोगों को खूब रास आ रहा है।

- शेफ नहीं, घर की महिलाएं बनाती है व्यंजन
घर के किचन की तरह ही इस रेस्टॉरेंट पर बनने वाले सभी व्यंजन होते हैं। इसका प्रमुख कारण है की यहां महिलांए ही किचन संभालती है, जिस तरह वे अपने घर परिवार में व्यंजन बनाती है उसी तरह यहां भी बनाए जाते हैं। यह शहर का पहला रेस्टॉरेंट हैं जहां खाना बनाने के लिए शेफ नहीं रखे गए हैं। जितना स्टॉफ यहां काम करता है उनमें से ८० प्रतिशत महिलाएं हैं। रेस्टॉरेंट संचालक मेघा थिटे एवं आकांक्षा आनंद ने बताया की इंदौर होलकर स्टेट का हिस्सा रहा है यहां उनका घर था। यहां खान पान के शौकीन एसे हैं जो सिर्फ अच्चे खाने की तलाश में रहते हैं और इसके लिए कहीं भी जा सकते हैं। यहां अधिकांश स्टेट के व्यंजन मिल जाएंगे, लेकिन एसा कोई ठिया नहीं था जहां मराठी व्यंजन ही मिले वह भी असली स्वाद के साथ। हम खुद परिवार के साथ कहीं जाते थे तो इसकी कमी खलती थी। इसके बाद हमने आपस में चर्चा की परिवार में बात की तो सभी को यह कॉंसेप्ट पसंद आया, इसके साथ ही हमनें महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भी इसमें महिलाओं की हिस्सेदारी सबसे अधिक रखी। आज रेस्टॉरेंट पर इंदौर के हर समाज, हर वर्ग के लोग आते हैं। इसके साथ ही पीथमपुर, धार, देवास जैसी जगहों से भी परिवार आने लगे हैं।

- पैसा कमाना मकसद नहीं, संस्क्ृति से करा रहे पहचान
रेस्टॉरेंट संचालक मेघा थिटे व आकांक्षा आनंद ने बताया की हमारा मकसद पैसा कमाना नहीं है। हम इस रेस्टॉरेंट के माध्यम से खानपान के शौकीनों को नया टेस्ट देने के साथ ही लोगों को मराठी संस्कृति से रूबरू करवा रहे हैं। इसके साथ ही महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का उद्देश्य भी इसके माध्यम से किया जा रहा है। यहां एक बार कोई भी आता है वह अगली वार परिवार व दोस्तों के साथ जरूर आते हैं।