
ASI major claim in Bhojshala case (फोटो- Patrika.com)
Bhojshala case: भोजशाला को लेकर हाईकोर्ट में एक माह से चल रही सुनवाई सोमवार को भी जारी रही। सोमवार को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) की ओर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसके जैन ने पक्ष रखना शुरू किया। उन्होंने दलील दी कि, वर्ष 1902-03 में एएसआइ ने धार में जो सर्वे किया था, उसकी रिपोर्ट में साफ लिखा है कि भोजशाला मंदिर है। यहां मस्जिद का निर्माण मंदिर से निकाली गई सामग्री से ही किया गया था। उस रिपोर्ट के मुताबिक यहां जो पत्थर लगे थे, उनमें संस्कृत में लिखे श्लोक मिले थे। (MP News)
जैन ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की कोर्ट को बताया कि इतिहास में समय-समय पर कई पर्यटक धार आए और भोजशाला को लेकर जो अनुभव किया, उसे लिपिबद्ध किया। साथ ही जैन ने भोजशाला को वक्फ संपत्ति घोषित करने को लेकर किए दावों को ये कहते हुए खारिज किया कि 1904 में ही एएसआइ ने भोजशाला को राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर घोषित कर दिया था। उसके बाद धार रियासत ने 1935 में एक अधिसूचना जारी कर इसे मस्जिद बताया था। वहीं पुरातत्व संबंधी कानून के प्रावधान स्पष्ट हैं, जिसके मुताबिक राष्ट्रीय महत्व की संपत्ति पर किसी को अधिकार नहीं था। ये साफ है कि धार रियासत को भी इसको लेकर कोई अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं था।
सुनवाई के दौरान एएसआइ के संपत्ति पर मालिकाना हक और अधिकार को लेकर उन्होंने कोर्ट में ये बात भी कही कि एएसआइ भोजशाला का स्वामी नहीं, अभिभावक है। समय-समय पर एएसआइ इसका रखरखाव करती है। जैन ने मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी, काजी जकुल्ला सहित अन्य की आपत्तियों का बिंदुवार जवाब दिया। उन्होंने इसे प्राचीन इमारत बताते हुए कहा कि, भोजशाला राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित धरोहर है। 1904 में इसकी विधिवत घोषणा एएसआइ ने की थी। उन्होंने बताया, मुस्लिम राजाओं ने मंदिर को मस्जिद में बदला था, जबकि मूल रूप से यह सरस्वती देवी का मंदिर ही है। एएसआइ की ओर से मंगलवार को भी तर्क रखे जाएंगे।
सोमवार को कमेटी की ओर से पेश होने वाले वकीलों ने कोर्ट में शिकायत की कि, कोर्ट आदेश के बावजूद भोजशाला में एएसआइ द्वारा किए सर्वे की वीडियोग्राफी हमें उपलब्ध नहीं कराई गई। एएसआइ ने इसे गूगल ड्राइव पर अपलोड किया, लेकिन उसका पासवर्ड हमें नहीं दिया। एएसआइ से हमने दरखास्त की थी कि हमारी ओर से पेश हो रहे वरिष्ठ अभिभाषक सलमान खुर्शीद को भी इसका पासवर्ड बता दें, लेकिन एएसआइ ने ऐसा करने से इंकार कर दिया। एएसआइ ने जवाब दिया कि आदेश के मुताबिक तीन लोगों के पास इसका पासवर्ड है। एक वो खुद, दूसरा कोर्ट और तीसरा याचिकाकर्ता के वकील।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने कोर्ट में वीडियोग्राफी को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें पिछले दिनों धार कोर्ट से एक नोटिस मिला, जिसमें एएसआइ के अफसरों को क्रॉस एग्जामिन करने की अनुमति कमेटी की ओर से मांगी गई है। कमेटी हाईकोर्ट के वीडियो को जिला अदालत में इस्तेमाल करना चाहती है, जो कानूनन गलत है। इस पर कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई। जिस पर कमेटी के वकील ने उस केस में इस्तेमाल करने को लेकर कोई योजना होने की बात से इंकार किया।
याचिकाकर्ता हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि वे याचिका में 13-14 मई को रिजॉइंडर देना चाहते हैं। इसकी अनुमति दी जाए। इस पर कोर्ट ने कहा कि हम इस मामले में सुनवाई पूरी करने के करीब हैं। याचिकाकर्ता, प्रतिवादी और इंटरविनर अपनी-अपनी बात रख चुके हैं और एएसआइ के वकील अपनी बात रख रहे हैं। अगर आप रिजॉइंडर ही देना चाहते हैं तो जल्द से जल्द दे दें। कोर्ट की इस मौखिक टिप्पणी से मामले में ग्रीष्मावकाश से पहले फैसला आने की संभावना बढ़ गई है। (MP News)
Published on:
04 May 2026 09:36 pm
बड़ी खबरें
View Allइंदौर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
