इंदौर. शारीरिक रूप से दाम्पत्य संबंध बनाने में अक्षम पति के खिलाफ कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए आठ हजार रुपए प्रति माह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया है। पत्नी को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताडि़त किए जाने के मामले में कोर्ट ने पति को भविष्य में ऐसा नहीं करने की सख्त हिदायत देते हुए दाम्पत्य से इनकार करने को भी घरेलू हिंसा माना है।
प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी आमोद आर्य ने अपने आदेश में कहा, पति का नैतिक व कानूनी दायित्व है कि वह पत्नी के भरण, पोषण व दैनिक आवश्यकताओं की समुचित व्यवस्था करे। प्रार्थी विजय नगर निवासी दीप्ति पेशवानी के अधिवक्ता केपी माहेश्वरी ने बताया, 4 फरवरी 2014 को दीप्ति का विवाह अशोक नगर निवासी जयकिशन पेशवानी से हुआ था।
शादी के कुछ समय बाद पता लगा, जयकिशन शारीरिक रूप से दाम्पत्य संबंध बनाने में अक्षम है। बात सामने आने पर जयकिशन एवं उसके परिजन दीप्ति को मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रताडि़त करने लगे। इससे तंग आकर वह मायके आ गई और जयकिशन के खिलाफ भरण-पोषण का केस दर्ज किया।