
इंदौर। महू के जाम गेट से एक किलोमीटर दूर स्थित माधौपुरा गांव के खेतों के बीच एक छोटी से झोपड़ी के आसपास पूरा गांव जमा है। महिलाएं रो रही हैं। पुलिस की गाड़ियां खड़ी हैं। जिस घर के बाहर मातम पसरा है, यह घर 21 साल के भेरूलाल मदन छारेल का है। 15 मार्च को डोंगरगांव चौकी के सामने पुलिस फायरिंग में भेरूलाल की मौत हो गई थी। यह युवक जाने-अनजाने में उपद्रवी भीड़ का हिस्सा बन गया था। यह भीड़ आदिवासी युवती की कथित गैंगरेप के बाद हत्या का विरोध करने के लिए जमा थी। चार भाइयों में सबसे बड़े भेरूलाल की कमाई से पूरा घर चलता था। उसकी परिवार की हालत ऐसी थी कि उसे अपना मोबाइल गिरवी रखकर पैसा लेना पड़ा था।
भैरूलाल की मां सुनीता और दादी झूमका बाई घर के कोने में बदहवाल बैठी थी। पुलिस के साये में भेरूलाल का अंतिम संस्कार हुआ। गांव का हर एक चेहरा गमगीन था। पूरा ही परिवार इस घटना से टूट गया है।
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घर लौट रहा था भेरूलाल
गवली पलासिया में अपने ताऊ दयाराम के घर रह रहा 21 साल का भेरूलाल पिता मदनलाल बुधवार रात को काम से लौट रहा था। डोंगरगांव चौकी पर हंगामा और भीड़ देख वहीं रुक गया था। वो जाने-अनजाने भीड़ का हिस्सा बन गया था। तभी भीड़ उपद्रव करने लगी और पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग करनी पड़ी। एक गोली भेरूलाल के पेट में लग गई और वो बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे पहले तो सिविल अस्पताल महू ले जाया गया, फिर इंदौर के एमवायएच भेजा गया। जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
रिश्ते की बात चल रही थी
तीन भाइयों और एक बहन में सबसे बड़े भेरूलाल की जल्द ही शादी होने वाली थी। निमाड़ अंचल में उसके रिश्ते की बात चल रही थी। जिस घर में आने वाले दिनों में शहनाई गूंजने वाली थी, वहां अब मातम है।
रिश्तेदारों ने बताया कि भेरूलाल के परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। माधोपुरा में पूरा परिवार छोटे से कच्चे मकान में रहता है। पिता मदन खेतीबाड़ी करते हैं। वहीं भेरूलाल गवली पलासिया मे ंरहकर नल फिटिंग का काम करता था। महीने भर में 9 हजार रुपए मिलते थे, जिससे उसका पूरा घर का गुजारा चलता था।
Updated on:
17 Mar 2023 01:38 pm
Published on:
17 Mar 2023 01:28 pm
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