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यह है एमपी की लखपति भिखारी, 45 दिन में कमाती है ढाई लाख रुपए

Millionaire Begger: इंदौर में महिला ने 45 दिन में भीख मांगकर कमाए ढाई लाख, लखपति भिखारी पर होगा केस दर्ज

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इंदौर

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Manish Geete

Feb 14, 2024

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लवकुश चौराहे पर बेटी के साथ भीख मांगकर एक महिला ने 45 दिन में ही ढाई लाख रुपए कमा लिए। इस लखपति भिखारी पर अब जेजे एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज होगा। बाल सुधार गृह में बेटी ने बयान दिया कि मां भीख मंगवाती थी। पूछताछ में महिला ने बताया था कि 45 दिन में उसने 2.5 लाख रुपए की कमाई की थी। इंदौर को भिखारी मुक्त बनाने के लिए कलेक्टर आशीष सिंह के निर्देश पर पांच दिन पहले संस्था प्रवेश की प्रमुख रुपाली जैन ने इंदिरा नामक महिला को बच्ची के साथ पकड़ा गया था। पूछताछ में महिला ने कहा, भीख मांग रही हूं।

इंदिरा के नाम पर बाइक और लाइसेंस

पूछताछ में पता चला, इंदिरा के नाम एक बाइक है। इसे चलाने का लाइसेंस भी है। उसे बाइक चलाना नहीं आती। लाइसेंस कैसे बनवाया, जांच का विषय है। वह अपनी कमाई का पैसा अपने पास रखती थी। पति की कमाई पति के पास तो बच्चों की कमाई बच्चों के पास रहती है। इंदिरा पर कार्रवाई की खबर लगते ही पति अमरलाल दो बेटों के साथ राजस्थान भाग गया है।

एनजीओ की अध्यक्ष ने किए कई खुलासे

एनजीओ की अध्यक्ष रूपाली जैन कहती हैं कि इंद्रा ने उनसे कई जानकारी शेयर की हैं। जिसमें उन्होंने बताया कि 45 दिन में भीख मांगकर ढाई लाख रुपए कमा लिए, जिनमें से एक लाख रुपए सास-ससुर को भेजे हैं। 50,000 रुपए बैंक खाते में जमा कर दिए और 50,000 रुपए की फिक्स्ड डिपाजिट (FD) कर दिया। इंद्रा का कहना है कि उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद भिक्षावृत्ति से उसके परिवार की कमाई बढ़ गई है, क्योंकि इस धार्मिक नगरी की ओर जाने वाले ज्यादातर श्रद्धालुओं की गाड़ियां इंदौर के लव-कुश चौराहे के यातायात सिग्नल पर रुकती थी। तो यहीं हमने भीख मांगना शुरू कर दिया। वो बताती है कि उसके पांच बच्चों में से दो बच्चे राजस्थान में हैं और वे तीन बच्चों के साथ भीख मांगती है। भिक्षावृत्ति कराने के मामले में इन बच्चों में शामिल 8 साल की लड़की को बाल कल्याम समिति की निगरानी में रखा गया है। दो लड़के टीम को देखकर भाग गए, जिनकी उम्र 9 साल और 10 साल है।

राजस्थान से जाते हैं देशभर में

राजस्थान के बारा जिले के कलमांडा को कुख्यात गांव माना जाता है। यहां से देशभर के अलग-अलग शहरों में भिक्षा मांगने लोग जाते हैं। यहां बच्चों की ज्यादा पैदाइश इसीलिए की जाती है कि बच्चों से भिक्षा मंगवाई जा सके। इंदौर के साथ ही भोपाल में भी बड़ी संख्या में राजस्थान की वेषभूषा पहने कई लोग फुटपाथ पर अपने बच्चों के साथ भीख मांगते देखे जाते हैं। भीख मांगने में सख्ती के कारण अब वे पेन-पेंसिल या खिलौने बेचने के बहाने भीख मांगते देखे जाते हैं।

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हाल ही में सरकार ने देश के कई शहरों को भिखारी मुक्त करने की योजना बनाई है। सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय का लक्ष्य 2026 तक इनको भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाने में जिला और नगर निगम का सहयोग करना है। इन शहरों में सर्वेक्षण और पुनर्वास के दिशा-निर्देशों की निगरानी सुनिश्चित करने के लिए मंत्रालय फरवरी के मध्य तक राष्ट्रीय पोर्टल और मोबाइल ऐप लॉन्च करेगा। भिक्षावृत्ति करने वालों की पहचान कर जानकारी ऐप पर अपडेट की जाएगी। सर्वेक्षण और पुनर्वास करने के लिए अधिकारियों को आश्रय, कौशल, शिक्षा और पुनर्वास की प्रगति रिपोर्ट मोबाइल ऐप और पोर्टल पर भी अपडेट करनी होगी। सर्वे में समान पैटर्न का पालन होगा। धार्मिक स्थल अयोध्या, ओंकारेश्वर, कांगड़ा, सोमनाथ, उज्जैन, त्र्यंबकेश्वर, पावागढ़, बोधगया, मदुरै, गुवाहाटी। पर्यटन स्थल जैसलमेर, तिरुवनंतपुरम, विजयवाड़ा, कुशीनगर, सांची, केवडिया, श्रीनगर, नामसाई, खजुराहो, पुड्डुचेरी। ऐतिहासिक उदयपुर, कटक, इंदौर, वारंगल, तेजपुर, मैसूरु, कोझिकोड, अमृतसर, पंचकूला, शिमला का चयन किया गया है।