
MP Election 2018 : चक्रव्यूह में फंसे भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश
इंदौर। हाई वोल्टेज विधानसभा-३ की चुनावी महाभारत में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश अपनों के ही चक्रव्यूह में फंस गए है। कांग्रेस के सभी योद्धा एक जाजम पर थे तो अंतिम समय में भाजपा में अपनों ने ही कलाकारी दिखा दी। वोटिंग के दिन इस बात का अहसास उन्हें हो चुका था। बची कसर मराठी वोट बैंक में सेंध और मुस्लिम बेल्ट में हुई जोरदार वोटिंग ने पूरी कर दी।
इंदौर की नौ विधानसभा में सबसे रोचक चुनाव कहीं के हैं तो वह तीन नंबर विधानसभा के हैं। यहां पर कैलाश विजयवर्गीय की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है। उनके बेटे आकाश का मुकाबला कांग्रेस के मंजे हुए नेता व पूर्व विधायक अश्विन जोशी से है। टिकट मिलने के बाद ऐसा माहौल था कि जैसे जीत विजयवर्गीय की झोली में ही रखी हो, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
विधायक उषा ठाकुर का टिकट कटाने में अहम् भूमिका निभाने वाले ही कई नेता धीरे-धीरे गायब हो गए। चुनावी महाभारत के आखिरी मतदान के दिन तो खुला खेल फर्रुखाबादी नजर आया। इस बात की जानकारी विजयवर्गीय और उनके परिवार को भी लग गई, लेकिन वे कुछ कर नहीं पाए। इधर, मुस्लिम मतदान केंद्रों पर उन्हें अंदाजा था कि ५० प्रतिशत के आसपास वोटिंग होगी, पर बम्पर वोटिंग हुई। इससे ही सारे समीकरण गड़बड़ा गए। स्थिति ये है कि कोई भी चौंकाने वाला परिणाम सामने आ सकता है।
नजर नहीं आईं ताई
लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने तीन नंबर से अपने बेटे मंदार का नाम रखा था, लेकिन बाद में राऊ में मधु वर्मा और सांवेर से राजेश सोनकर को टिकट दिलाकर वो भी पीछे हट गईं। पूरे चुनाव में ताई ने तीन नंबर में कदम नहीं रखा, न ही एक भी बैठक ली। इसका असर ये हुआ कि रामबाग जैसे मराठी वार्ड में आकाश पकड़ नहीं कर पाए।
धीरे-धीरे बढ़ती गई भाजपा में खाई
पर्दे के पीछे की कहानी ये है कि विधानसभा-३ में नगर भाजपा अध्यक्ष गोपीकृष्ण नेमा की मजबूत दावेदारी थी। नेमा को टिकट नहीं मिला तो उन्होंने क्षेत्र में देखना छोड़ दिया। उनके साथ टीम भी नगर के चुनावी मैनेजमेंट में जुट गई। बागी होकर खड़े हुए ललित पोरवाल को पार्टी ने बैठा जरूर दिया, लेकिन वे सक्रिय नहीं हुए। गोविंद मालू पूरे चुनाव में नजर नहीं आए।
इधर, आकाश के चुनाव का पूरा मैनेजमेंट विजयवर्गीय के खास केके गोयल, नीरज याग्निक, गौरव रणदिवे व मनीष मामा जैसे नेताओं ने संभाल लिया। नाम के लिए उमेश शर्मा, ईश्वर बाहेती सहित अन्य नेताओं को आगे रखा गया। धीरे-धीरे स्थानीय नेता और आयातित नेताओं के बीच खाई बढ़ती गई। इसका असर आखिरी दिन साफ दिखाई दिया।
एक हो गई कांग्रेस
जोशी के टिकट घोषणा के समय कवायद लगाई जा रही थी कि वरिष्ठ नेता महेश जोशी व उनके बेटे पिंटू नाराज हैं, लेकिन चुनाव में परिवार की एकता साफ नजर आई। इधर, कैलाश से जितने भी पीडि़त कांग्रेसी थे, सभी ने दिल खोलकर जोशी की मदद की। पिछले चुनाव में पार्षद अभय वर्मा व अरविंद बागड़ी पर असहयोग का आरोप लगा था, लेकिन इस बार कहानी अलग थी।
वर्मा ने जोशी का जनसंपर्क करवाया, साथ में पूरी टीम को काम पर लगा रखा था क्योंकि पूर्व सांसद सज्जनसिंह वर्मा की विजयवर्गीय से पटरी नहीं बैठती। बात रही बागड़ी की तो नगर निगम चुनाव में विजयवर्गीय ने उनकी पत्नी को हराने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। इसका बदला लेने के लिए बागड़ी ने भी पूरी लगन से काम किया।
Published on:
30 Nov 2018 10:39 am
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