
मध्यप्रदेश चुनाव 2023
सचिन त्रिवेदी, इंदौर। सुबह के करीब 7.30 बजे का वक्त। इंदौर से रतलाम के लिए निकली डेमू ट्रेन अजनोद से फतेहबाद के बीच पटरियों पर आगे बढ़ रही है। मुख्य इंजन से चौथे नंबर के डिब्बे में त्योहारी सीजन की भीड़ है, करीब सभी सीटों पर यात्री नजर आते हैं तो कुछ युवा दरवाजे के पास खड़े हैं। ज्यादातर खिड़कियों के कांच गिरे हुए हैं, क्योंकि गुलाबी सर्दी की दस्तक ने ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ा दी है। यह ट्रेन सुबह 6 बजे इंदौर से निकलती हैं, इसलिए सफर के दौरान ज्यादातर यात्री झपकी लेते नजर आते हैं, कुछ मोबाइल में खोए हैं तो कुछ बुजुर्ग मौसम और खेती-किसानी का माहौल टटोलने चर्चारत हैं।
डिब्बे में डेली अपडाउन करने वाले नौकरीपेशा वर्ग के लोग भी हैं। लोकतंत्र के उत्सव प्रादेशिक विधानसभा चुनाव की हलचल यहां नजर नहीं आ रही थी और न ही किसी की आपसी चर्चा में चुनावी गणित या सरकार बनने या न बनने जैसे शब्द सुनाई दे रहे थे। हालांकि दो व्यक्ति अखबार पढ़ रहे थे। इनसे चुनाव के माहौल और परिवहन के दौरान यात्रियों की सुविधाओं जैसे मुद्दों पर बात शुरू की। पूछा-17 नवंबर को वोटिंग है, आप किसे चुनेंगे। जवाब मिला-अभी तो प्रत्याशी को समझ रहे हैं, चुनाव तक पता चल जाएगा, किसे वोट दें और किसे नहीं, हम तो उसी को चुनेंगे, जिसकी नजर आम व्यक्ति की पीड़ा पर हो।
बुजुर्ग बोले-भाई, कोई ट्रेन की भी तो सुध ले
चुनाव पर चर्चा हो रही थी कि एक बुजुर्ग बोले-भाई गांव में तो कई मुद्दे हैं, लेकिन पैसे लेकर सफर कराने वाले परिवहन साधनों की तरफ भी देखा जाना चाहिए। डेमू ट्रेन चित्तौड़ से लेकर महू तक आती-जाती है। हजारों लोग रोजाना सफर करते हैं, लेकिन ट्रेन में साफ-सफाई का हाल बुरा है। शौचालय तो है, लेकिन जाने से पहले नाक पर कपड़ा लगाना पड़ता है। अवैध रूप से नकली शुद्ध पानी 15 से 20 रुपए में बेचा जाता है। कोई नेता ध्यान नहीं देता, जबकि ये छोटी-छोटी ट्रेन ही आम व्यक्ति की आवाजाही का बड़ा सहारा है।
अंकल...हम पढ़ तो रहे हैं, नौकरी की गारंटी कहां है
दरवाजे की तरफ बैग लटकाए कुछ युवा कभी बाहर तो कभी अंदर देख रहे थे। एक युवा से पूछा-वोट डालते हो। जवाब मिला-अभी नाम आया है, 17 नवंबर को वोटिंग करूंगा। मुद्दों पर बात हुई तो जवाब आया कि अंकल, हम तो खूब पढ़ रहे हैं, लेकिन नौकरी की गारंटी कोई नहीं देता। हमारे गांव (बलौदा टाकून) के कई युवाओं ने इंदौर से इंजीनियरिंग की, लेकिन प्राइवेट काम करना पड़ रहा है। स्वरोजगार के लिए भी आवेदन किए थे, लेकिन बैंक प्रोजेक्ट की सूची में नाम ही नहीं आता। सरकार का लोन भी समय पर नहीं मिलता है।
बीज की मारामारी, बीमा भी नहीं मिल रहा
खेती-किसानी पर बात कर रहे बुजुर्ग से भी चुनावी माहौल पर चर्चा की। नदंकिशोर पाटीदार निवासी नौगांवा का कहना था कि सालभर अलग-अलग फसल लेते हैं, अब बीज की समस्या आ गई है। कुछ सालों से तो नकली बीज भी खूब आ रहा है। कई किसान अपनी फसल गंवा चुके हैं। उस पर बिन मौसम बारिश मेहनत पर पानी फेर देती है। सरकार बार-बार फसल बीमा के नियम बदलती है। पटवारी भी सही जानकारी नहीं देते। ऐसे में किसान बीमा का प्रीमियम भरने के बाद भी फसल बीमा का लाभ समय पर नहीं मिलता।
डेमू ट्रेन महू से शुरू होकर चित्तौडगढ़़ तक जाती है। इसमें रोजाना इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच और चित्तौडगढ़़ जिलों के यात्री सफर करते हैं। इनका जुड़ाव करीब 32 विधानसभा सीटों से है। 2018 व उपचुनाव के आंकड़ों में इनमें से 21 सीट भाजपा तो 11 सीटों पर कांग्रेस को जीत मिली थी। राजनीति के जानकारों की मानें तो परिवहन साधनों का उपयोग करने वाले ज्यादातर लोग एक्टिव वोटर होते हैं। इनकी चर्चा में एक से दूसरी विधानसभा शामिल होती है और इसका प्रभाव माहौल बनने के तौर पर होता है।
Published on:
29 Oct 2023 08:18 am
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