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जबलपुर में ब्लैकलिस्टेड कंपनी रामकी को इंदौर नगर निगम ने दिया 280 करोड़ को ठेका

नगर निगम की बंदरबाट....

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नितेश पाल@ इंदौर. शहर की पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने के नाम पर बंदरबाट के साथ नगर निगम में बड़ा खेल हो गया। निगम ने २,80,00,00,000 यानी 280 करोड़ रुपए का ठेका ऐसी कंपनी को दे दिया, जिसे जबलपुर नगर निगम 2012 में ब्लैक लिस्टेड कर चुकी है। यही नहीं इंदौर में भी पानी की लाइन बिछाने का काम सही ढंग से नहीं करने पर निगम पेनल्टी ठोंकने के साथ अर्नेस्ट मनी जब्त कर चुकी है। इसके बावजूद निगम अफसरों ने कम बिड की दलील देकर शहर में पानी की 28 टंकियां बनाने का ठेका बांट दिया।

निगम ने अमृत परियोजना के तहत 28 टंकी बनाने का टेंडर जारी किया था। इसमें रामकी इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने 280 करोड रुपए का टेंडर डाला, जिसे इंदौर नगर निगम ने स्वीकृत करते हुए कंपनी को काम सौंप दिया।

जबलपुर में प्रोजेक्ट उदय के तहत सीवरेज लाइन डालने, गंदे पानी के सभी आउट फाल्स को जोडऩे आदि का ठेका कंपनी ने लिया था। काम सही तरीके से काम नहीं करने पर एक्शन लेते हुए तत्कालीन निगमायुक्त एनबीएस राजपूत ने रामकी को 16 अप्रैल 2012 से ब्लैक लिस्टेड कर दिया था, तब से कंपनी ब्लैक लिस्टेड है।

कोर्ट में लंबित है रामकी की याचिका

जबलपुर नगर निगम की ब्लैक लिस्टेड करने की कार्रवाई के खिलाफ रामकी ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका (रिट पिटीशन 8457/2012) दायर की थी। ये याचिका लंबित है। हाई कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक इस केस में 25 अगस्त 2014 के बाद कोई तारीख नहीं लगी है।

याचिका लंबित इसलिए नहीं किया प्रदेश में ब्लैक लिस्टेड
जबलपुर नगर निगम ने रामकी को पूरे प्रदेश में ब्लैक लिस्टेड करने को लोक निर्माण विभाग को पत्र लिखा था। इसके खिलाफ रामकी हाईकोर्ट गई थी। हाईकोर्ट के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग ने फैसला लिया कि चूंकि जबलपुर में कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने को लेकर याचिका लंबित है, इसलिए रामकी को प्रदेश स्तर पर ब्लैक लिस्टेड करने का फैसला नहीं लिया जा सकता है।

इंदौर में जब्त की थी 3 करोड़ की अर्नेस्ट मनी
प्रोजेक्ट उदय के तहत ही इंदौर में तृतीय चरण की पानी की टंकियों को बनाने और उनकी लाइन डालने का काम रामकी को सौंपा गया था। कंपनी टेंडर की समय सीमा में काम पूरा नहीं कर पाई थी। तत्कालीन ननि अफसरों ने सही ढंग से काम नहीं करने पर रामकी पर करोड़ों रुपए की पेनल्टी लगाई थी। साथ ही कंपनी की तीन करोड़ से ज्यादा की अर्नेस्ट मनी जब्त कर ली थी।

जिम्मेदारों के बोल...
28 टंकियों का टेंडर दिया है, पर अमृत परियोजना के तहत टेंडर नगरीय प्रशासन विभाग की हाईलेवल कमेटी द्वारा स्वीकृत किए जाते हैं। सभी टेंडर भोपाल की हाईलेवल कमेटी ने किए हैं।
मालिनी गौड़, महापौर, ननि

जबलपुर में ब्लैक लिस्टेड होने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। कंपनी ने इंदौर में टेंडर प्रोजेक्ट कास्ट से ३.४५ करोड़ कम में काम लिया है।
मनीष सिंह, निगमायुक्त