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शहर के सिर्फ दो अस्पतालों में ही सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा, कैसे बचाएंगे नवजात की जान!

स्वास्थ्य विभाग के अस्पताल साबित हो रहे सफेद हाथी, सारा दबाव झेल रहा एमवाय अस्पताल, लाल अस्पताल की नर्स सस्पेंड, दो डॉक्टरों को नोटिस  

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इंदौर

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Reena Sharma

Jul 12, 2019

indore

शहर के सिर्फ दो अस्पतालों में ही सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा, कैसे बचाएंगे नवजात की जान!

रणवीरसिंह कंग @ इंदौर. मल्हारगंज पॉली क्लिनिक (लाल अस्पताल) में लापरवाही से नवजात की मौत के मामले ने प्रदेश की आर्थिक राजधानी और स्वास्थ्य मंत्री के शहर में सरकारी अस्पतालों की हालत फिर उजागर कर दी। स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में करोड़ों रुपए खर्च होने के बाद भी सिर्फ दो अस्पतालों में सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा है। इससे सारा दबाव मेडिकल कॉलेज के एमवाय अस्पताल पर पड़ता है।

गौरतलब है, बुधवार को लाल अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने पर नर्स ने प्रीति वामन की डिलीवरी करा दी। नवजात के नहीं रोने पर उसे खून से सनी हालत में एमवाय अस्पताल ले जाने को कह दिया। एंबुलेंस और ऑक्सीजन नहीं मिलने पर परिजन टैक्सी कर एमवाय अस्पताल पहुंचे, जहां नवजात को मृत घोषित कर दिया गया। मामले में अस्पताल के ग्राफ की जांच में पता चला, स्टाफ नर्स वैशाली ने हर दो घंटे में गर्भस्थ शिशु का फॉलोअप नहीं लिया। बच्चे को रैफर करने की प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। यहां तक कि जननी एक्सप्रेस को भी सूचना देकर नहीं बुलाया। नर्स को सस्पेंड कर लापरवाही बरतने वाले अस्पताल प्रभारी डॉ. अशोक मालू और ड्यूटी डॉक्टर वंदना केसरी को विभागीय कार्रवाई के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

जिला अस्पताल :

100 से 300 बिस्तर का बनाने का बजट मंजूर हो चुका है। करीब एक साल से नई इमारत का निर्माण तो दूर पुरानी इमारत तोडऩे की फाइल ही कागजों में घूम रही है। काम तो शुरू नहीं हुआ, लेकिन सुविधाओं को अन्य अस्पतालों में शिफ्ट कर दिया गया। यहां रैन बसेरे में बिस्तर लगाकर सामान्य डिलीवरी की ही व्यवस्था है।

हुकमचंद पॉलीक्लिनिक

हुकमचंद पॉलीक्लिनिक स्वास्थ्य विभाग का दूसरा अस्पताल है, जहां सिजेरियन डिलीवरी की सुविधा है, लेकिन डायलिसिस जिला अस्पताल से शिफ्ट कर महिलाओं के बिस्तर कम कर दिए गए। यहां केवल प्लान सिजेरियन होते हैं। पहले जहां रोज दो-तीन ऑपरेशन होते थे, अब तीन दिन में एक पर ही सीमित रह गए हैं।

ओल्ड डिस्पेंसरी अरण्य नगर

20 बिस्तर की डिस्पेंसरी में एक माह पहले डिलीवरी सुविधा शुरू की गई थी, लेकिन सिर्फ एक ही डिलीवरी हो पाई है। डॉ. प्रीति शाह भंडारी स्टाफ नर्स से विवाद के बाद से कई दिनों से छुट्टी पर हैं। इसके बाद से स्थिति समझी जा सकती है। यहां इलाज के लिए जो भी आता है, डॉक्टर नहीं है का जवाब मिलता है।

पीसी सेठी अस्पताल

स्वास्थ्य विभाग ने पीसी सेठी अस्पताल की 100 बेड की इमारत शुरू होने के बाद एमवाय अस्पताल में मरीजों को सीधे रैफर करने के बजाय पहले यहां भेजने के लिए रैफरल सिस्टम बनाया था। यहां आइसीयू, ओटी आदि तो हैं, लेकिन गंभीर नवजात बच्चों के लिए एसएनआइसीयू सहित पर्याप्त साधन नहीं हैं। रात को इमरजेंसी में सिजेरियन डिलीवरी की भी व्यवस्था नहीं है।

लाल अस्पताल

जिला अस्पताल बंद होने के बाद पश्चिम क्षेत्र में यही सरकारी अस्पताल है, लेकिन जर्जर भवन के साथ विशेषज्ञों की कमी है। यहां रोज 4 से 5 डिलीवरी हो रही हैं। जिला अस्पताल से यहां सुविधाएं तो शिफ्ट हुईं, लेकिन ऑपरेशन की व्यवस्था नहीं है।

बाणगंगा अस्पताल : 30 बेड के बाणगंगा अस्पताल का उद्घाटन ओटी के साथ हुआ था, लेकिन सिजेरियन की सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।

मांगीलाल चूरिया अस्पताल

20 बिस्तर के अस्पताल में दो डॉक्टर और 25 लोगों का स्टाफ तैनात है। यहां औसतन दो डिलीवरी रोज हो पाती हैं। किचन नहीं होने से खाना नहीं बनता। 15 दिन से वार्डबॉय की ड्यूटी बदलने के कारण नंदानगर प्रसूतिगृह से आने वाला खाना भी नहीं पहुंच रहा। प्रसूतिगृह में 30 बेड मंजूर हैं, लेकिन जगह की कमी से 15 बिस्तर ही लगे हैं।
कहने को 34 अस्पताल, सुविधा न के बराबर

इंदौर जिले में 8 सिविल डिस्पेंसरी, 25 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 14 शहरी प्राथमिक केंद्र, 111 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। 100-100 बिस्तर के जिला अस्पताल, पीसी सेठी अस्पताल और महू अस्पताल है। 20 बिस्तर के मल्हारगंज के साथ तीन सिविल अस्पताल, मांगीलाल चूरिया, बाणगंगा, मानपुर, बेटमा, देपालपुर और सांवेर में 30-30 बिस्तर के 6 सामुदायिक अस्पताल हैं। 34 अस्पतालों में मरीजों को भर्ती करने की सुविधा है, लेकिन इलाज में सभी सफेद हाथी साबित होते हैं। इन सभी में महिलाओं को ही भर्ती करने की सुविधा है, यानी पुरुष मरीजों के लिए सिर्फ एमवाय अस्पताल और बीमा अस्पताल में ही जगह है।

स्टाफ की लापरवाही

यह सही है, अस्पतालों में स्टाफ और संसाधनों की कमी से सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। व्यवस्था में सुधार के प्रयास जारी हैं। बच्चे की मौत में स्टाफ की लापरवाही सामने आई है। बच्चे का सही फॉलोअप नहीं किया गया। जननी एक्सप्रेस नहीं बुलाई गई। मामले में स्टाफ नर्स को सस्पेंड कर दो डॉक्टरों से जवाब मांगा है।

डॉ. प्रवीण जडिय़ा, सीएमएचओ, इंदौर