
NEET TOPPER श्रेयस को पिता ने पहले ही गिफ्ट कर दी थी फॉरेन ट्रिप, मॉरिशस में पता चला रिजल्ट
इंदौर. देश की सबसे बड़ी मेडिकल परीक्षा नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस एग्जाम (नीट) का रिजल्ट नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) द्वारा दोपहर 12 बजे घोषित किया गया। इस परीक्षा में शहर में श्रेयस अग्रवाल ने (ऑल इंडिया रैंक 58) पहला स्थान, सार्थक शर्मा ने (एआइआर 75) दूसरा स्थान और क्षितिज भारद्वाज ने (एआइआर 142) तीसरा स्थान प्राप्त किया। ये तीनों एलन कॅरियर इंस्टिट्यूट के स्टूडेंट्स हैं।
ये रही कट ऑफ पर्सेंटाइल
एक्सपर्ट केके शर्मा ने बताया, पहली बार एनटीए ने एग्जाम करवाया था तो जिन बच्चों ने एनसीईआरटी पर फोकस किया और एक्यूरेसी के आधार पर पेपर सॉल्व किया, उन्हें इसका फायदा मिला। पेपर आसान आने की वजह से कटऑफ बढ़ी है। इस साल जनरल की 50 पर्सेंटाइल कटऑफ स्कोर 701 से 134 रहा। ओबीसी, एससी और एसटी का 40 पर्सेंटाइल और कटऑफ स्कोर 133 से 107 रहा। सामान्य दिव्यांग का कटऑफ 120 मार्क्स और ओबीसी, एससी एसटी दिव्यांग का कटऑफ 107 माक्र्स रहा।
दो घंटे के लिए साइट हुई क्रैश
नीट की साइट पर ओवरलोडिंग की वजह से दो घंटे के लिए साइट क्रैश हो गई। इसकी वजह से कई स्टूडेंट्स को अपना रिजल्ट चेक करने में परेशानी का सामना करना पड़ा। शाम 6 बजे इस समस्या को हल करने के लिए एनटीए ने दो सर्वर बनाए।
वीडियो कॉल पर जाहिर की खुशी
नाम- श्रेयस अग्रवाल
पिता- डॉ. जीवन अग्रवाल
माता- डॉ. चंद्रश्री अग्रवाल
ऑल इंडिया रैंक- 58वीं
मार्क्स - 685
आज ही मैं मॉरीशस पहुंचा हूं। यहां आकर रिजल्ट पता चला तो खुशी तो बहुत हो रही है, लेकिन अपनी सक्सेस को सबके साथ सेलिब्रेट नहीं कर पा रहा हूं। काश मैं आज इंदौर में होता। ये बात पत्रिका से वीडियो कॉलिंग में नीट एग्जाम के सिटी टॉपर श्रेयस अग्रवाल ने कही। उन्होंने बताया कि पिछले दो सालों से मैं एग्जाम की तैयारी कर रहा था। मुझे क्रिकेट और स्पोट्र्स में बेहद रुचि है, लेकिन दो साल तक मैंने सिर्फ स्टडी पर ही फोकस किया। कभी-कभी खुद को रिलेक्स रखने के लिए क्रिकेट खेलता था या फिर कॉमेडी वीडियोज देखता था। मैं सात घंटे की नींद लेता था और उसके बाद 14 से 15घंटे पूरी तरह से पढ़ाई करता था। मुझे पूरा यकीन था कि एआइआर-100 में रैंक जरूर मिलेगी। दो साल से फोन का उपयोग सिर्फ ऑनलाइन स्टडी मटेरियल के लिए ही किया है। मुझे पैरेंट्स हमेशा मोटिवेट करते थे और सबसे अच्छी बात उन्होंने कभी मेरी तुलना दूसरे बच्चों के साथ नहीं की। तय था कि रिजल्ट अच्छा आएगा इसीलिए फादर ने पहले ही फॉरेन ट्रिप गिफ्ट कर दी थी।
देवास-इंदौर अप डाउन के दौरान भी करता था स्टडी
नाम - सार्थक शर्मा
पिता- डॉ. सुनील शर्मा
माता- डॉ. महिमा शर्मा
मार्क्स - 682
एआइआर- 75वीं
सार्थक बताते हैं मेरे रोल मॉडल मेरे पैरेंट्स रहे हैं। वे दोनों ही डॉक्टर हैं और इस वजह से मैं हमेशा से डॉक्टर बनना चाहता था, क्योंकि मैंने फील किया कि ये लाइफ सेविंग जॉब है। मैं हर दिन सात से आठ घंटे पढ़ाई करता था और कोचिंग के लिए देवास से अप-डाउन किया करता था। देवास से आते समय हमेशा नोट्स पढक़र उस टाइम का उपयोग करता था। मैं हर टेस्ट के बाद पेपर एनालिसिस कर अपने स्ट्रॉन्ग और वीक पॉइंट पर ध्यान देता था और इम्प्रूवमेंट करता था। मैं एमजीएम में एडमिशन लेना चाहता हूं। पैरेंट्स की तरफ से अच्छे रिजल्ट के लिए आईफोन १० गिफ्ट मिला है।
कॉम्पीटिशन की फीलिंग से मिला मोटिवेशन
नाम- क्षितिज भारद्वाज
पिता- मुकेश भारद्वाज
माता- उषा भारद्वाज
एआईआर- 142वीं
मार्क्स - 675
क्षितिज बताते हैं कि कोचिंग में मेरे फ्रेंड सार्थक के मुझसे ज्यादा अच्छे माक्र्स आते थे। मेरे अंदर कॉम्पीटिशन की फीलिंग आई और उससे मोटिवेशन मिला। ये एक पॉजीटिव कॉम्पीटिशन था और इस वजह से मुझे अच्छा स्कोर करने में मदद मिली। शुरुआत में मेरी परफॉर्मेंस अच्छी नहीं थी, लेकिन मैंने धीरे-धीरे इम्प्रूव किया। एग्जाम से एक महीने पहले मैं 14 से 15 घंटे पढ़ाई करता था। एनटीए ने पहली बार एग्जाम कराया था तो एनसीईआरटी से ज्यादा सवाल आए, जिसका फायदा मिला। मैं खुद को रिलेक्स रखने के लिए फ्रेंड्स और फैमिली से बात करता था। कोटा में अच्छा बैच नहीं मिलने की वजह से मैंने इंदौर को सिलेक्ट किया।
फैक्ट फाइल
- शहर में 32 सेंटर्स पर 23 हजार स्टूडेंट्स ने दी परीक्षा
-15,19,375 स्टूडेंट्स रजिस्टर्ड हुए
-14,10,755 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए
-154 शहरों के परीक्षा केन्द्रों पर 11 भाषाओं में हुई परीक्षा
-6,30,283 छात्र तथा 7,80,467 छात्राएं शामिल
-3,51,278 छात्र व 4,45,761 छात्राएं चयनित घोषित
Published on:
06 Jun 2019 01:25 pm
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