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एमराल्ड हाईट्स प्रबंधन की लापरवाही ने ली उभरते फुटबॉलर नितेश की जान… 

त्र को करंट लगने के बाद स्कूल प्रबंधन रास्ते के सात बड़े अस्पताल छोड़कर 12 किलोमीटर दूर मनोरमागंज स्थित मयंक अस्पताल लेकर पहुंचा, जबकि उसे रास्ते में ही उपचार दिया जा सकता था।

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Shruti Agrawal

Aug 29, 2016

emerald heights school indore

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इंदौर. राऊ स्थित एमराल्ड हाईट्स इंटरनेशनल स्कूल में रविवार दोपहर करंट लगने से 11वीं के छात्र अश्विन उर्फ नितेश की मौत के मामले में स्कूल प्रबंधन की गंभीर लापरवाही सामने आई है। छात्र को करंट लगने के बाद स्कूल प्रबंधन रास्ते के सात बड़े अस्पताल छोड़कर 12 किलोमीटर दूर मनोरमागंज स्थित मयंक अस्पताल लेकर पहुंचा, जबकि उसे रास्ते में ही उपचार दिया जा सकता था।

रविवार दोपहर 1.30 बजे स्कूल परिसर में बने स्केटिंग ग्राउंड में अश्विन दोस्तों के साथ फुटबॉल खेल रहा था। इसी दौरान तेज किक मारने पर बॉल बाउंड्रीवॉल से बाहर चली गई। अश्विन भागता हुआ बाउंड्रीवॉल के पास पहुंचा। दीवार पर लगाई गई लोहे की बेंच पर खड़ा होकर बाउंड्री के बाहर किसी को बॉल फेंकने के लिए देखने लगा।

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इसी दौरान बायां हाथ बाउंड्रीवॉल की जाली पर रखा और वाटर कूलर के कट लगे बिजली के तार के कारण वहां फैले करंट का झटका लगा। इससे वह सिर के बल नीचे गिर गया। छात्र को अस्पताल वार्डन पीयूष जोशी लेकर पहुंचे थे। बाद में स्कूल संचालक मुक्तेश्वर सिंह पहुंचे और नाना कंचनसिंह चौहान को फोन पर सूचना दी। परिजन के पहुंचने से पहले स्कूल संचालक व प्रबंधन के लोग गायब हो गए।

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इकलौता बेटा था
चोइथराम में मौत की पुष्टि होने पर ऑटो पाट्र्स और प्रॉपर्टी का काम करने वाले पिता प्रेमसिंह और मां किरण की हालत बिगड़ गई। इधर, एमवाय अस्पताल में पीएम के दौरान नाना कंचनसिंह चौहान भी विलाप करते-करते बेसुध हो गए। उन्हें भी कार में बैठाकर घर भेजा गया। मामा दिनेशसिंह चौहान ने स्कूल प्रबंधन की लापरवाही से मौत होने का आरोप लगाकर आक्रोश जताया। उन्होंने बताया कि अश्विन एलकेजी से स्कूल में पढ़ रहा था। होनहार खिलाड़ी होने के कारण खेल और पढ़ाई के सिलसिले में बोर्डिंग में डाला था। परिवार ढाई लाख रुपए के करीब सालाना फीस भर रहा था।

हमारा टाईअप है
पलासिया टीआई राजेंद्र सोनी ने छात्र को लाने वाले वार्डन पीयूष जोशी से बात की और इतनी दूर घायल को लाने का पूछा। इस पर जोशी ने कहा कि अस्पताल से बच्चों के इलाज का टाईअप है।

स्कूल से हमारा कोई टाईअप नहीं
&हमारा स्कूल से कोई टाईअप नहीं है और न मेरे परिवार का कोई बच्चा वहां पढ़ता है। मुक्तेश्वरसिंह मरीज को लाने से पहले यहां पहुंच गए थे। मरीज की यहां पहुंचने से पहले ही मौत हो गई थी।
डॉ. संजय गुप्ता, मयंक अस्पताल

पैसे की चिंता थी तो एक बार बोलते
&करंट लगने के बाद बच्चे को चार किमी दूर चोइथराम अस्पताल या अन्य किसी बड़े अस्पताल क्यों नहीं ले जाया गया। टाईअप के चक्कर में इतनी दूर छोटे अस्पताल में लाया गया। पैसे की चिंता थी तो एक बार हमें बोलते तो सही।
कंचनसिंह चौहान, भाजपा नेता व अश्विन के नाना

नहीं उठाया फोन
घटना के संबंध में स्कूल प्रबंधन का पक्ष जानने की कोशिश की गई तो कई बार प्रयास के बाद भी संचालक मुक्तेश्वर सिंह मीडिया के सामने नहीं आए। उनके प्रिंसिपल बेटे सिद्धार्थ सिंह ने फोन (9229349203) रिसीव नहीं किया।