23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

टीबी रोगियों के साथ अब परिजन की भी जांच

- मरीजों के संपर्क में आए ६ हजार से अधिक लोगों की जांच, चार हजार से अधिक का चल रहा उपचार- वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त किए जाने की कवायद शुरू

2 min read
Google source verification
टीबी रोगियों के साथ अब परिजन की भी जांच

टीबी रोगियों के साथ अब परिजन की भी जांच

इंदौर. राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत अब टीबी रोगियों के साथ ही उनके परिजन की भी समय-समय पर जांच कर उपचार किया जा रहा है, ताकि संपर्क में आने के कारण उनमें संक्रमण की आशंका को खत्म किया जा सके।
वर्ष 2025 तक देश को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत इंदौर में काम किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में इंदौर प्रदेश में अव्वल है और छह महीने में टीबी के लिए 4779 से अधिक लोगों का प्राथमिक उपचार शुरू किया गया। इनमें से 139 अप्रैल 2022 तक अपना इलाज पूरा कर लेंगे। वहीं सभी रोगी अगस्त तक इलाज पूरा कर लेंगे।
मरीजों की तलाश जारी
जिला टीबी कार्यक्रम अधिकारी डॉ. राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि पीएमटीपीटी से गुजरने वाले लोगों को जीवन में टीबी होने की आशंका न के बराबर होगी। उन्होंने बताया कि इंदौर में पीएमटीपीटी को सितंबर 2021 में लॉन्च किया गया था। छह महीनों में टीम को जिले में 2320 से अधिक रोगी पाए हैं और 6191 से अधिक लोगों का कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग भी किया है। जिनमें संपर्क में रहने वाले 4779 लोगों को टीपीटी दे रहे हैं, जिनमें १ से ४ साल की उम्र वाले 386 और पांच साल से अधिक आयु वाले 4393 शामिल हैं। अन्य मरीजों की तलाश जारी है।
घर-घर जाकर कर रही टीम जांच
टीमों को नेतृत्व करने वाले राजू चौधरी और रोहित पाटिल ने बताया कि टीमें मरीजों के घर पहुंच रही हैं और उन्हें परीक्षण और सलाह दे रही हैं। लोगों की सहमति के बाद उनका टीपीटी शुरू किया जाता है। किसी के घर टीबी का मरीज है और उसमें टीबी के लक्षण नहीं हैं, इगरा जांच में लेटेंट टीबी हो तो टीपीटी से ठीक किया जा रहा है। इसमें टीबी संक्रमण को जड़ से खत्म करने में सहायता मिलेगी। इसमें अभी तक 4984 लोगोंकी जांच की जा सकी है। नई गाइड लाइन के अनुसार टीबी रोगियों के संपर्क में आने वाले वयस्कों को भी टीपीटी ट्रीटमेंट दी जा रही है। लेटेंट टीबी संक्रमण का इलाज करके हम हजारों लोगों को इस बीमारी को विकसित होने से रोक सकते हैं और अंतत: जीवन बचा सकते हैं। टीबी की बीमारी दो तरह की होती है लेटेंट टीबी और एक्टिव टीबी। आपके शरीर में टयूबरक्यूलोसिस के बैक्टीरिया हो सकते हैं लेकिन आपकी इम्यूनिटी इन्हें शरीर में फैलने से रोके रहती है इसे छिपा हुआ या लेटेंट टीबी कहते हैं। टीबी के जीवाणु हम सभी में मौजूद रहते हैं। अगर इम्यूनिटी मजबूत हो तो यह सक्रिय टीबी की बीमारी में नहीं बदल पाते।
दो वर्ष में इंदौर में टीबी के मामले-
वर्ष 2020 -7565
2021- 8576
2022 - 1204
(जनवरी में 605 और फरवरी में 599)