जस्टिस पीके जायसवाल और डीके पालीवाल की युगल पीठ ने कलेक्टर के आदेश को जनता के खिलाफ नहीं माना है। अतिरिक्त महाअधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने बताया, कोर्ट का कहना है जिला प्रशासन दुर्घटनाओं में कमी लाने का प्रयास कर रहा है तो उसे रोकना उचित नहीं है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कुछ फैसलों का भी उल्लेख किया है। मार्च 2015 में तत्कालीन कलेक्टर आकाश त्रिपाठी ने आदेश दिए थे कि जिले के सभी पेट्रोल पंप पर बिना हेलमेट लगाए लोगों को पेट्रोल नहीं दिया जाएगा। इस निर्णय के खिलाफ इंदौर अभिभाषक संघ के पूर्व सचिव सौरभ मिश्रा ने 31 मार्च को जनहित याचिका दायर की। 4 अप्रैल को कोर्ट ने कलेक्टर के आदेश पर स्टे दे दिया। मिश्रा के वकील एनके माहेश्वरी ने याचिका में कहा था, पेट्रोल भरवाते समय गाड़ी न तो चलती और न स्टार्ट रहती है। इंजन ऑफ करने के बाद ही पेट्रोल टैंक खुलता है। उन्होंने कलेक्टर के आदेश को अवैध बताया था।
पालन करवाएंगे
हेलमेट वालों को ही पेट्रोल देने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी गई है। अब जल्द ही आदेश का पालन करवाएंगे।
- पी. नरहरि, कलेक्टर