
इंदौर. करीब डेढ़ वर्ष से अटकी एप बेस्ड कैब-रिक्शा-बाइक सेवा के लिए एग्रीकेटर पॉलिसी को लागू कर दिया गया है। हाल ही में राज्य सरकार इस पॉलिसी को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। जिसके तहत अब एप बेस्ड ओला, उबर, रैपीडो, जुगनू आदि टैक्सी कंपनियों को आरटीओ से नए सिरे से लाइसेंस फीस भरकर लाइसेंस लेना होगा। इस पॉलिसी में यात्री सुविधाओं और सुरक्षा को लेकर विशेष ध्यान दिया गया है। अब से कंपनी बनाकर चलाए जाने वाले सभी कैब और ऑटो में ड्राइवर का फोटो, नाम, टेलीफोन, लाइसेंस नंबर और वाहन की श्रेणी, बीमा की समयावधि प्रमाण पत्र सहित अन्य जानकारियों को वाहनों में डिस्प्ले करना होगा। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा के लिए कैब में पैनिक बटन लगाना अनिवार्य होगा। इतना ही नहीं नए नियमों के अनुसार कंपनी बनाकर कैब का संचालन करने पर लाख रुपए की बैंक गारंटी भी देनी होगी। कंपनी में लगाए जाने वाले ऑटो रिक्शा को चलाने के लिए दो लाख व किराए पर मोटर साइकिल संचालन के लिए एक लाख रुपए की बैंक गारंटी ली जाएगी।
परिवहन आयुक्त डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि मप्र मोटरयान अधिनियम, 1988 के तहत मप्र कैब, मोटर कैब, ऑटो रिक्शा तथा मोटर साइकिल भाड़े पर देने के लिए एग्रीकेटर नियम 2018 लागू कर दिया गया है। यह ९ सितंबर से लागू हो गया है। पॉलिसी में लाइसेंस फिस को भी कई गुना बढ़ा दिया गया है। अभी तक इन कंपनियों को आरटीओ से महज ट्रेड सर्टिफिकेट लेना होता था, जिसके लिए एक हजार रुपए फीस लगती थी, लेकिन अब कैब संचालन की लाइसेंस फीस 50 हजार रुपए, ऑटो रिक्शा के लिए फीस 25 हजार और बाइक टैक्सी लिए 15 हजार लाइसेंस फीस अदा करना होगी।
कम से कम 25 वाहन होना जरूरी
नए पॉलिसी के तहत जो ट्रेवल्स संचालक एक से दो टैक्सी, ऑटो व मोटर साइकिल का संचालन किराए पर कर रहे हैं, वे इनके दायरे में नहीं आएंगे। किसी भी कैब या अन्य कंपनी को कम से कम 25 गाडिय़ां जरूरी होगी। इसके बाद ही यात्रियों को बैठाने का लाइसेंस जारी किया जाएगा।
अब यह करना होगा
वाहनों में यात्रा करने वाले यात्री को प्रिंटेड रसीद के अलावा ई-मेल या मोबाइल पर भी यात्रा का विवरण देना होगा। कैब या ऑटो चलाने वाली कंपनी के मालिकों को पहली बार में दो साल के लिए लाइसेंस दिया जाएगा। कंपनी संचालित कैब, ऑटो व मोटर साइकिल का किराया निर्धारित करने का अधिकार परिवहन विभाग को होगा।
कंपनियों पर कसी नकेल
- वाहन में सभी हेल्पलाइन नंबर लिखना जरूरी होगा।
- गाड़ी में काले कांच या पर्दे नहीं लगे होना चाहिए।
- कैब कंपनी का फर्म एवं कंपनी में रजिस्टर्ड होना चाहिए।
- आरटीओ मुख्यालय में पूरा ब्यौरा, ई-मेल, कार्यालय प्रभारी की जानकारी देना होगी।
वर्जन...
सोमवार से आवेदन आना शुरू हो जाएंगे। अब संबंधित कंपनियां मनमानी नहीं कर पाएंगी। लाइसेंस फीस भी कई गुना बढ़ा दी गई है। - जितेंद्र सिंह रघुवंशी, आरटीओ
Published on:
14 Sept 2019 11:27 am
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