इन दिनों बाबा की की तबीयत कुछ नासाज है। वे चना गोदाम स्थित गेजवेल अस्पताल में 102 नंबर के वार्ड में भर्ती है। सन्यासी बाबाश्री केशवानंदजी के अनुसार उनका जन्मस्थान यूँ तो बिहार के बेतिया रियासत रहा है और वे अपने पिता रामगोविंद मिश्र के इकलौते पुत्र रहे हैं जिनके पास ५०० गाँवों की जागीरदारी रही। लेकिन वे पिता से बड़ा कद अपने गुरु का मानते हैं और आगे चलकर उनके गुरु रहे हैं नेपाल के महाराज श्री दरयावसिंह। बाबा बताते हैं कि वें इतिहास भूगोल, एलजेबरा, संस्कृत और अंग्रेजी विषय के साथ ११ क्लास तक पढ़े हैं। इकलौती संतान होने के कारण पिता उनको फौज में नहीं भेजना चाहते थे लेकिन १८ साल की उम्र में फौज में भर्ती हुए और १९१४ से १६ तक वे टर्की में सेना की बटालियन में भर्ती रहे। चार साल तक वे सेना में रहे और समय पड़ने पर तोप भी चलाते थे। उस समय फौज में उन्हें १३० रुपए मासिक मिलते थे जबकि पुलिस वालों का वेतन ५ रुपए होता था।