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प्याज हुआ सस्ता, 3 से 5 रुपए किलो बिक रहा

किसान फिर मुश्किल में: मंडी में प्याज तीन से पांच रुपए बिक रहा

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प्याज हुआ सस्ता, 3 से 5 रुपए किलो बिक रहा

इंदौर. किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने इस साल से प्याज को भावांतर योजना में शामिल किया, लेकिन 16 मई से शुरू हुई प्याज खरीदी में बेस्ट क्वालिटी का उचित दाम नहीं मिलने से फिर वे नाराज नजर आ रहे हैं।
शुक्रवार को चोइथराम फल सब्जी मंडी में खरीदी के तीसरे दिन प्याज की बंपर आवक रही। सरकार ने सरकारी रेट प्रति किलो ८ रुपए रखा है। मॉडल रेट और समर्थन मूल्य के बीच का अंतर किसानों को भावांतर योजना में दिया जाएगा। इंदौर संभाग में चोइथराम मंडी के अलावा बदनावार, राजगढ़ और खंडवा में खरीदी केंद्र शुरू किए गए। 30 जून तक खरीदी की जाएगी। तीन दिन में चोइथराम मंडी में 1.40 लाख क्विंटल प्याज की आवक हो गई।

रात 9 बजे मंडी में प्रवेश
आवक को देखते हुए मंडी प्रशासन ने रात 9 बजे बाद मंडी में किसानों के प्रवेश की व्यवस्था की है। इधर सुबह 9 बजे से नीलामी शुरू की जा रही है, ताकि किसानों की फसल तुलाई में समय न लगे। शुक्रवार को 71 हजार 250 क्विंटल प्याज की आवक हुई।

कम में कर रहे खरीदी
इधर, देवास जिले की हाटपीपल्या तहसील के ग्राम देवगढ़ से आए किसान त्रिलोकचंद पाटीदार, धन्नालाल पाटीदार और संतोष ने बताया, भावांतर योजना के तहत प्याज लेकर मंडी में आए तो 3 से लेकर 5 रुपए तक का भाव मिला। उनका कहना है, व्यापारी अच्छा माल भी कम दाम में खरीद रहे हैं। किसान फिर ठगा रहा है। उन्होंने बताया, पहले तहसील में अफसरों की लापरवाही से पंजीयन नहीं हुआ। फिर सोसायटी गए तो वहां हड़ताल हो गई। सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद पंजीयन हुआ।

लहसुन जैसे हाल
किसान संतोष पाटीदार का कहना है, भावांतर में लहसुन २००० से २२०० रुपए क्विंटल बिक रहे थे, लेकिन जैसे ही योजना में खरीदी हुई, भाव 1000 रुपए आ गए।

अंतर देगी सरकार
भावांतर योजना में खरीदी शुरू हुई है। सरकार किसानों को भाव में अंतर की राशि देगी। यदि व्यापारी अच्छी फसल कम दाम में खरीद रहे हैं तो देखेंगे। सरकारी रेट 800 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है।
-निधि निवेदिता, एडीएम

ये दस्तावेज देने पर होगा पोर्टल पर दर्ज
चोइथराम मंडी प्रभारी पर्वतसिंह सिसौदिया का कहना है, मंडी में उपज बेचने के बाद किसान को गेटपास पर्ची, अनुबंध पर्ची, तौल पर्ची, भुगतान पत्रक मंडी में देना होगा। फिर ऑपरेटर पोर्टल पर दर्ज करेगा। इसके बाद सरकारी किसान को उसके अंतर की राशि खाते में सीधे दी जाएगी।