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इंदौर

Pizza ऑर्डर करते ही फोन का डेटा लीक….आपकी सारी प्राइवेट जानकारी हो रही शेयर

Online Frauds: आप पिज्जा सहित विभिन्न ऑर्डर करने के लिए कंपनियों को अपनी निजी जानकारी दे रहे हैं तो आप खतरे में पड़ सकते हैं।

इंदौरJul 10, 2024 / 03:18 pm

Ashtha Awasthi

Online Frauds

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Online Frauds: डिजिटल अरेस्ट की बढ़ती वारदातों के बीच पुलिस जांच में सामने आया है कि बदमाश उन लोगों को अधिक टारगेट कर रहे हैं, जो ऑनलाइन सुविधाओं का विभिन्न ऐप के माध्यम से उपयोग करते हैं। पिज्जा से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग में दी गई सही जानकारियां अक्सर आमजन पर ही भारी पड़ती है।
निजी जानकारियां अगले ही पल लीक हो जाती है, जिनका इस्तेमाल कर बदमाश डिजिटल अरेस्ट से लेकर अन्य सोशल माध्यमों से ठगी का शिकार बना लेते हैं। ठग वारदात को ऐप के माध्यम से अंजाम देते हैं ताकि पुलिस उसकी लाइव लोकेशन ट्रेक नहीं कर सकें।
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शहर में कई वारदातें सामने आई

डॉक्टर दंपति को थाईलैण्ड पहुंचे पार्सल में अवैध ड्रग्स मिलना बताया तो आरआर कैट के रिसर्च स्कॉलर को भी कुरियर में अवैध सामग्री होने का डर दिखाकर डिजिलट अरेस्ट कर लिया। साफ्टवेयर इंजीनियर युवती और कम्पनी सेक्रेटरी युवती को भी डिजिटल अरेस्ट कर लाखों की ऑनलाइन ठगी कर ली गई।

इस तरह रखें खुद को सुरक्षित

-डिजिटल अरेस्ट की वारदात लगातार बढ़ रही है। इन वारदातों के पीछे की मुख्य वजह डाटा लीक है। पिज्जा सहित विभिन्न ऑर्डर करने के लिए लोग कंपनियों को अपनी निजी जानकारी दे रहे हैं जैसे कि नाम, पता, नंबर, लोकेशन आदि। लेकिन उन्हें नहीं पता कि उनका डाटा लीक हो रहा है। इसका इस्तेमाल साइबर ठग कर रहे हैं। यदि ऑनलाइन ऐप में डिलीवरी के लिए जानकारी देना है तो अपना नाम बदलकर डालें। अन्य जानकारी भी अधूरी दे सकते हैं। जिससे किसी का कॉल आने पर आप उसे पकड़ सकें।
-डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। एजेंसी इस तरह की कार्रवाई नहीं करती।

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तकनीक के जानकार हैं क्रिमिनल, धड़ल्ले से कर रहे वारदात

-पंद्रह वर्ष से लोग मिटिंग के लिए स्काइप सहित कई ऐप का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐप की मदद से होने वाले वीडियो कॉल वाइस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआइपी) पर काम करती है। ठग डिवाइस में सिम इस्तेमाल नहीं करते। इंटरनेट कॉलिंग फरियादी के इलाके के मोबाइल टॉवर पर रिकार्ड नहीं होता। मोबाइल टॉवर बायपास हो जाए और कॉल डिटेल में लोकेशन न आए इस वजह से अपराधी लगातार वारदात कर रहे हैं।
-स्काइप का मुख्यालय यूएस में है। जिस स्काइप आईडी से वारदात हुई उसकी जानकारी पाने के लिए पुलिस संपर्क करती है। इसमें 4 से 6 हफ्ते लगते हैं।

अब तक 2 केस दर्ज

एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट की 4 शिकायतें मिली है जिसमें 2 केस दर्ज हुए है। एक केस में ठगों के खाते से लाखों रुपए ब्लॉक किए हैं। स्काइप मुख्यालय में मेल कर संबंधित स्काइप आइडी की जानकारी मांगी गई है।

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