
Organ Donation
Organ Donation: मध्यप्रदेश के इंदौर शहर में पहली बार किसी ब्रेनडेड व्यक्ति के दोनों हाथ, किडनी, लिवर, आंखें और स्किन एक साथ डोनेट की गई। न्यूरोलॉजिकल प्राब्लम के कारण ब्रेन डेड घोषित व्यापारी सुरेंद्र पोरवाल(जैन) के अंगदान के लिए सोमवार को शहर में 60वां ग्रीन कॉरिडोर बना। इसमें उनके हाथ, किडनी, स्किन व आंखें दान की गईं। जब अंग बॉक्स में ले जाए जा रहे थे, तब पूरा परिवार शांति पाठ करते हुए साथ चला। यह देखकर सभी की आंखें नम हो गईं।
शैल्बी हॉस्पिटल में उपचाररत मनोरमागंज निवासी पोरवाल को अंगदान अधिनियम अनुसार चार चिकित्सक के दल (डॉ. विवेक जोशी, डॉ. अमित माहेश्वरी, डॉ. अभिषेक सोनगरा, डॉ. अचल अग्रवाल) द्वारा ब्रेन डेड प्रमाणित किया गया। सांसद शंकर लालवानी, संभागायुक्त दीपक सिंह की मॉनिटरिंग व एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन व इंदौर सोसाइटी फॉर ऑर्गन डोनेशन के सचिव डॉ. वीपी पांडे से अनुमति प्राप्त की गई।
मुस्कान ग्रुप के सेवादार जीतू बागानी व संदीपन आर्य ने बताया कि इसके बाद अंगदान व ग्रीन कॉरिडोर बनाने की प्रक्रिया पूरी हुई। इस अंगदान में दोनों हाथों को भी डोनेट किया गया, जो अपने आप में नई बात है। उनके हाथों को 12 घंटे जब जीवित रखा गया।
कॉरिडोर 1 : शैल्बी हॉस्पिटल से एयरपोर्ट के लिए बनाया गया। दोनों हाथ चार्टर्ड प्लेन से मुंबई के ग्लोबल हॉस्पिटल भेजे गए। जहां एक ही व्यक्ति को लगाए जाएंगे। लिवर को इसी प्लेन से मुंबई के जूपिटर हॉस्पिटल भेजा। 12 मिनट में एंबुलेंस अस्पताल से एयरपोर्ट पहुंची।
कॉरिडोर 2 : शैल्बी अस्पताल से चोइथराम अस्पताल तक बनाया। इसमें एक किडनी पहुंचाई गई।
कॉरिडोर 3 : शैल्बी अस्पताल से अपोलो अस्पताल तक बनाया। इसमें दूसरी किडनी पहुंचाई गई।
दोनों हाथ चार्टर्ड प्लेन से ग्लोबल हॉस्पिटल मुंबई भेजे गए। यह पहली बार है जब परिवार द्वारा मृतक व्यक्ति के दोनों हाथ दान किए गए हों। कुछ साल पहले ब्रेन डेड व्यक्ति का एक हाथ दान करने की प्रक्रिया हो चुकी है। सोमवार को सांसद शंकर लालवानी हॉस्पिटल पहुंचे व पोरवाल को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि हम सरकारी अस्पतालों में अंग पुनर्प्राप्ति शुरू करने पर काम कर रहे हैं। इंदौर दौरे के दौरान स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के साथ भी इस पर चर्चा की है।
Published on:
31 Dec 2024 06:00 pm
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