
पत्रिका स्टिंग : ‘खूनी’ चिकित्सा पद्धति की आड़ में लोगों की जान से खिलवाड़
अर्जुन रिछारिया. इंदौर. जीपीओ के सामने गैरेजों के बीच दो कमरों का एक अस्पताल। बाहर बोर्ड पर लिखा है जटिल रोग निदान केंद्र, नीचे डॉक्टर का नाम है डॉ. एम. मुसअब। डिग्री की जगह बीयूएमएस दर्ज है। वहां बैठे रोगियों में किसी को साइटिका है तो किसी को गठिया। टेबल पर मर्तबान में सांप जैसा जीव लेकर बैठे डॉक्टर के पास इन सबका एक ही इलाज है, शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कट लगाना और फिर चाइनीस कप से वैक्यूम के जरिये ढेर सारा खून निकालना।
यह दृश्य पढऩे में जितना भयावह लग रहा है, देखने में उससे कहीं ज्यादा डरावना है। लगता है, जैसे सैकड़ों साल पीछे चले गए हैं, जहां इलाज के नाम पर अत्याचार किया जा रहा है। यह कहीं और नहीं मप्र की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट के घर से बमुश्किल दो-ढाई किमी की दूरी पर चल रहा है। स्वास्थ्य और आयुष विभाग को इस अजीबोगरीब दवाखाने के बारे में कोई खबर ही नहीं है। खूनी चिकित्सा पद्धति की परतें उघाड़ता पत्रिका का स्टिंग...
इलाज का पर्चा भी नहीं
पत्रिका रिपोर्टर जब इलाज कराने डॉक्टर एम. मुसअब के पास पहुंचा तो उन्होंने लिखित में एक भी दस्तावेज नहीं दिया। बार-बार मांगने पर भी उन्होंने यही कहा कि हम पूरा रिकॉर्ड खुद मंैटेन करते हैं। दवाइयां भी यहीं से दी जाती हैं।
महीनों चलता है इलाज
स्टिंग के लिए रिपोर्टर खुद मरीज बनकर पहुंचा। बताया, शरीर में दर्द होता है। एक हजार रुपए फीस भरने के बाद नंबर मिला 42वां। सुबह के सेशन में कुल 80 मरीज आए थे। कमाई का अंदाजा आसानी से लगा सकते हैं। मरीजों में संभ्रांत परिवारों से लेकर पुलिस अफसर भी शामिल थे। सभी को एक ही इलाज दिया जा रहा था। पूछताछ में पता चला, मरीजों को कई बार बुलाया जाता है और हर बार इसी तरह खून निकाला जाता है। पहली बार हजार रुपए लिए जाते हैं, जबकि अगली तारीखों पर कप की संख्या के अनुसार, 700-800 से कम नहीं वसूलते।
क्या है हिजामा
हिजामा एक यूनानी चिकित्सा पद्धति है जो मुस्लिम देशों में इस्तेमाल की जाती है। इसमें अनुभवी चिकित्सक किसी जगह पर जमा हुआ खराब खून निकालकर बीमारी का इलाज करते हैं। इसमें शरीर पर दर्द वाली जगह कट लगाए जाते हैं।
इलाज के बाद बिगड़ी तबीयत
जोड़ों में दर्द के लिए डॉ. मुसअब के पास पहुंचा तो उन्होंने कप लगाकर जोड़ों में से खून निकाल लिया। तबीयत बिगडऩे से बॉम्बे हास्पिटल में भर्ती होना पड़ा। ब्लड व किडनी में संक्रमण हो गया और एक माह में ठीक हो सका।
- भूपेंद्र सिंह भाटिया
मुझे आपसे पता चला है। कपिंग पद्धति या फिर हिजामा जैसी चिकित्सा के बारे में मुझे जानकारी नहीं है। यदि इस तरह से इलाज किया जा रहा है तो हम जल्द जांच कमेटी बनाएंगे।
शिखा दुबे, अपर मुख्य सचिव, आयुष विभाग
सरकार को जल्द ही रिपोर्ट भेजूंगा
मुझे इन दोनों पद्धतियों के बारे में जानकारी नहीं थी। पत्रिका से जानकारी मिलने के बाद अब मैं सरकार को इस मामले की पूरी रिपोर्ट भेजूंगा। यदि बिना किसी वैज्ञानिक आधार के इलाज हो रहा है तो इसे बंद करवाया जाएगा। - डॉक्टर
प्रवीण जडिय़ा, सीएमएचओ
सीएमएचओ करें मुझ पर कार्रवाई
- आप कैसा इलाज कर रहे हैं
जहां भी दर्द होता है, वहां कप के माध्यम से खराब खून खींचकर बीमारी ठीक करते हैं।
- कोई वैज्ञानिक आधार है
नहीं, लेकिन यह प्राचीन पद्धति है जो हजारों साल से चल रही है। अनुभव से इलाज किया जाता है।
- किन बीमारियों में इस तरह से इलाज हो रहा है
गठिया, जोड़ों का दर्द, स्लीप डिस्क, माइग्रेन, शारीरिक कमजोरी और इस तरह की कई बीमारियों में इलाज हो रहा है।
- इलाज से किसी को नुकसान होता है तो कौन जिम्मेदार है
यदि किसी को नुकसान होता है तो डॉक्टर की जिम्मेदारी है और सीएमएचओ कार्रवाई कर सकते हैं।
Published on:
11 Jan 2019 02:32 pm
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