पलक गर्ग ने बताया कि जब मैं गैजेट एडिक्ट थी, उस वक्त मुझे बिहेवरियल प्रॉब्लम थी। मैं पैरेन्ट्स सहित परिवार के हर सदस्य से बदतमीजी से पेश आने लगी थी। फोन से चिपके रहने पर जब कोई मुझे टोकता था तो गुस्सा आता था। फिर मैंने योग पर रिसर्च शुरू किया। मुझे महसूस हुआ कि एडिक्शन से बाहर निकलने के अन्य उपाय सतही हैं, क्योंकि वे केवल कुछ देर आपको गैजेट्स से दूर तो कर देते हैं, पर आपकी सोच नहीं बदलते, योग आपकी थिंकिंग बदल देता है और आप अपनी इच्छा से गैजेट्स का इस्तेमाल सीमित कर देते हो।