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पट्टे के लिए परेशान हो रहे थे गरीब…पटवारी ने बैठकर भर दिए पूरे गांव के फॉर्म

सराहनीय कार्य : मुख्यमंत्री आवास भू-अधिकार योजना में दिए जाने हैं पट्टे, एमपी ऑनलाइन पर 100 रुपए, कले?टर के निर्देश पर हो रहा काम  

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पट्टे के लिए परेशान हो रहे थे गरीब...पटवारी ने बैठकर भर दिए पूरे गांव के फॉर्म

पट्टे के लिए परेशान हो रहे थे गरीब...पटवारी ने बैठकर भर दिए पूरे गांव के फॉर्म

इंदौर। ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी आबादी की जमीन पर रहने वालों को मुख्यमंत्री आवास भू-अधिकार योजना में पट्टे दिए जा रहे हैं। इसके आवेदन ऑनलाइन हो रहे हैं, जिसके चलते एमपी ऑनलाइन केंद्रों की जमकर दुकान चल रही है। 50 से 100 रुपए गरीबों से फॉर्म भरने के लिए जा रहे हैं, जिसको देख एक पटवारी ने अपने ही लैपटॉप से 550 परिवारों के आवेदन भर दिए।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण क्षेत्र की सरकारी जमीन पर बस्ती बनाकर रह रहे गरीबों को अधिकार पत्र देने घोषणा की थी। योजना में ज्यादा से ज्यादा लोगों को फायदा मिले, उसको लेकर समय-समय पर वे निगरानी भी कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले कलेक्टरों की बैठक में उन्होंने जानकारी भी मांग ली थी। जिलों की स्थिति देखकर काम को अच्छे से करने के भी निर्देश दिए। उसके बाद कलेक्टर मनीष ङ्क्षसह ने एक बैठक में अधीनस्थों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए थे तो जिनके यहां गति कम मिली, उन्हें समझाइश भी दी गई।

आवेदन को लेकर एक समस्या और भी आ रही है। ये आवेदन ऑनलाइन भरे जा रहे हैं। गरीबों को उसकी कीमत चुकानी पड़ रही है। एमपी ऑनलाइन केंद्र में आवेदन भरने के दौरान 50 से 100 रुपए लग रहे हैं। सभी अपने-अपने हिसाब से पैसा ले रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के आसपास के केंद्रों पर भीड़ लगी है। कुछ दिनों पहले पट्टे बनवाने के लिए जागरूक करने पहुंचे पटवारी सचिन मीणा को गरीबों ने अपना दर्द बताया कि वे 100 रुपए नहीं दे पाएंगे। इस पर मीणा ने अपने ही लैपटॉप से गरीबों के आवेदन भरना शुरू कर दिए।

देखते ही देखते 550 गरीबों के आवेदन जमा कर दिए गए। इसके लिए पटवारी को लगातार धरावरा में धरना देना पड़ा। बड़ी बात ये भी है कि 250 से अधिक आवेदन को तहसीलदार तक पहुंचा दिया गया ताकि वे भी खानापूर्ति करके कलेक्टर मनीष सिंह के पास भेज सकें। गौरतलब है कि कई बार पटवारी मीणा नामांक-सीमानकन बटांकन जैसे कामों में जब उलझे तो उन्होंने क्ह्रश्वयूटर के जानकार की मदद लेकर भी ऑनलाइन आवेदन कराएं।

कई जगह की हालत खस्ता
गौरतलब है कि कुछ जगहों पर तो पटवारियों ने जोरदार काम किया। असर ये है कि गांवों में आबादी की जमीन पर जितने लोग बसे हैं सभी के आवेदन हो गए। देखा जाए तो सांवेर में अब तक सबसे अच्छा काम हुआ है। कई पटवारियों की हालत बहुत खराब है जिनके क्षेत्र के गांवों में एक-एक, दो-दो आवेदन ही आए हैं। कुछ गांव तो ऐसे भी हैं जहां का अब तक कोई खाता भी नहीं खुला है।