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इंदौर। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नंबर वन बनने की कवायद में जुटे इंदौर के युवाओं ने ऐसी तकनीक ईजाद की है, जो भविष्य में होने वाली बीमारियों के बारे में पहले ही आगाह कर देती है। स्वाब (लार) से हासिल डीएनए रिपोर्ट के आधार पर कई लोग इन बीमारियों का प्रिवेंटिव इलाज भी ले रहे हैं। प्रिवेंटिव हेल्थ केयर के लिए मायडीएनएपीडिया क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ डायबिटीज, ब्लड प्रेशर जैसी लाइफ स्टाइल से जुड़ी बीमारियों की आशंका पहले से पता की जा सकती है बल्कि कैंसर, किडनी, हार्ट की भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों का भी करीब-करीब सटीक अनुमान लगाया जा रहा है।
देश के कई बड़े अस्पतालों और डाइग्नोस्टिक सेंटरों में धीरे-धीरे इस टेस्ट को प्राथमिकता दी जाने लगी है। देश के कई नामी स्पोर्ट्स क्लब अपने खिलाड़ियों का भी ये टेस्ट करा रहे हैं। इसकी रिपोर्ट के आधार पर वे कमियां दूर कर पा रहे हैं।
ऐसे आया आइडिया
रिमी ने बताया, इंदौर से बीफार्मा करने के बाद बीआइटी रांची से एमफार्मा किया। इसके बाद फार्मा इंडस्ट्री में तीन साल तक काम किया। पति का ट्रांसफर इंदौर हुआ। यहां मेरे पिताजी का डाइग्नोस्टिक का काम था। फार्मा इंडस्ट्री और डाइग्नोस्टिक इंडस्ट्री में बीमारी के बाद जांच और उपचार है। तब विचार आया कि ऐसी तकनीक पर काम हो, जिससे बीमारी से बचाव के लिए कदम उठाए जा सकें।
1 परसेंट डीएनए का ही अंतर
रिमी सैनी ने पल्लव खंडेलवाल व अंकित अग्रवाल के सहयोग से इस किट की खोज की है। रिमी ने बताया, सभी लोगों में 99 फीसदी डीएनए समान होता है। सिर्फ 1 फीसदी के अंतर से ही हमारी कद-काठी, स्वास्थ्य में बदलाव आता है। इसी 1 फीसदी डीएनए का सैंपल लेने की प्रक्रिया आसान है। टेस्ट साधारण होने से इसकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ी है। जांच के लिए किट से बकल कैविटी पर 10 बार रब करना है। इस टेस्ट के लिए एक पैनल सेटअप किया है। इससे बीमारियों की आशंका आसानी से पहचानी जा सकती है।
Published on:
21 Feb 2023 05:36 pm
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