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पोहे में आई रिकार्ड तेजी, दाल-चावल, चना, तुअर, उड़द, बासमती भी महंगा, जानें इंदौर का बाजार भाव

Indore Market Rates : इंदौर के कारोबारियों की मानें तो बारिश के दिनों में अनाज, दलहन, तिलहन, शकर की आवक घट जाती है, जिसके चलते बाजार भाव में बढ़ोतरी हुई है।
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Indore Market Rates

Indore Market Rates (इंदौर का बाजार भाव Photo Source- Patrika)

Indore News : दाल-चावल, शकर, तेल की तेजी ने एक बार फिर आम लोगों की हालत पतली कर दी है। कारण है रॉ-मटेरियल के महंगे होने से खेरची कामकाज प्रभावित है, कीमतों में लगातार उतार चढ़ाव देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के आर्थिक शहर इंदौर के कारोबारियों से मिली जानकारी के अनुसार, बारिश के दिनों में जहां अनाज, दलहन, तिलहन, शकर की उपलब्धता में कमी आ रही है जिसके चलते तैयार माल महंगा बिकने लगा है। बीते सप्ताह के मुकाबले मौजूदा समय के भाव में 3 से 4 रुपए किलो तक बढ़ोतरी आ चुकी है।

दालों में आया उछाल

बीते एक सप्ताह के भाव पर ही गौर करें तो इंदर के बाजार में आई बढ़ोतरी के अनुसार, चना दाल फुटकर में 85 से 90 रुपए प्रति किलोग्राम चल रहे हैं। यही दाल बीते सप्ताह 80 से 85 रुपए प्रति किलो के भाव से मिल रही थी। यही स्थिति तुअर दाल की है जो 110 से 140 रुपए की रेंज में आ गई है। इसमें तुअर दाल बोल्ड 110 से 135, आयातित तुअर दाल 83 से 84, मूंग मोगर 117 से 120, उड़द दाल 118 से 125, उड़द मोगर 129 से 135 रुपये प्रति किलोग्राम।

चावल के दाम भी चढ़े

इस कुछ साथ चावल बासमती (921) 125 से 140 रुपए प्रति किलो मिल रहा है तो तिबार 110 से 125, दुबार 105 से 110, मिनी दुबार 90 से 95, मोगरा 70 से 80, बासमती सैला 8500 से 100, कालीमूंछ 95 से 100, राजभोग 80 से 85, दूबराज 55 से 65, परमल 45 से 50, हंसा सैला 46 से 48, हंसा सफेद 40 से 42 रुपए प्रति किलोग्राम बिक रहा है।

आगे त्यौहारी सीजन

बताया गया कि, आगे त्यौहारी सीजन को देखते हुए खपत में बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है। यहां का मुख्य नाश्ता पोहा पैकिंग में जहां 85 से 90 रुपए मिल रहा है, वहीं फुटकर में ये 80 रुपए किलो की रेंज में लिया जा सकता है। बीते दिवस खोपरा बूरा में 100 रुपए प्रति 15 किलोग्राम की तेजी हुई।

तेजी की वजह उपलब्धता

कारोबारियों के अनुसार अनाज, दलहन, तिलहन सहित किराना जिन्सों में तेजी की मुख्य वजह उपलब्धता का प्रभावित होना है। ट्रकों के भाड़े में भी खासा इजाफा हो चुका है। उत्पादक केन्द्रों से लगातार ऊंचे भाव पर सौदें हो रहे हैं जिसे देखते हुए तेजी पर अंकुश थोड़ा मुश्किल नजर आ रहा है।