
इंदौर. रेलवे (Railway) के किसी भी प्रोजेक्ट को समय-सीमा में पूरा करना तो दूर, शुरू करने की कवायद में भी लेटलतीफी आदत बन चुकी है। 7 माह पहले सांसद शंकर लालवानी ने रेलवे स्टेशन के पुनर्निर्माण की घोषणा की थी, लेकिन अब तक निर्माण संबंधी एक भी औपचारिकता पूरी नहीं की गई। इसे भी रेल लाइनों के वर्षों से लंबित प्रोजेक्ट से नए रेलवे स्टेशन को जोड़ा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि कहीं इसका भी वहीं हश्र न हो, जो पुराने कई प्रोजेक्टों का हुआ है।
भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की तर्ज पर इंदौर स्टेशन का कायाकल्प होना है। अप्रेल में स्टेशन का पुर्ननिर्माण के साथ प्लेटफॉर्म नंबर 4 से यूनिवर्सिटी तक विस्तार किया जाना प्रस्तावित किया गया। जून में दो चरणों में योजना को पूरा करने की घोषणा की गई, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई खास काम नहीं हो सका। सांसद और पूर्व-वर्तमान डीआरएम ने भी स्टेशन का दौरा किया, लेकिन न तो डिजाइन फाइनल की और न ही सर्वे कराया। रतलाम रेल मंडल के पीआरओ खेमराज मीना ने बताया, स्टेशन को लेकर पिछले दिनों सर्वे टीम आई थी। इसके आगे की जानकारी लेकर ही बता पाऊंगा।
ऐसी बदली स्टेशन की योजना
अप्रेल में रेलवे ने निर्माण का मॉडल सार्वजनिक किया था। 12 हजार यात्रियों की क्षमता के हिसाब से डिजाइन बनाई गई थी। 2200 करोड़ की लागत से एयरपोर्ट की तर्ज पर निर्माण किया जाना था। 50 साल की जरूरतों के हिसाब से पीपीपी मॉडल पर मार्डन रेलवे स्टेशन के तहत अत्याधुनिक सुविधा से लैस किया जाना है। ऑटोमेशन, एआइ आधारित सर्विसेस, लिफ्ट, एस्क्लेटर समेत मॉल, फाइव स्टार होटल और कर्मिशयल कॉम्प्लेक्स बनना हैं। स्टेशन का दायरा बढ़ाकर यूनिवर्सिटी तक करने की योजना है। पीपीपी मॉडल के तहत एक बार में ही निर्माण होना था, लेकिन जून में इसमें बदलाव किया गया। अब दो चरणों में काम होगा। रेलवे खुद निर्माण करेगा। पहले चरण में 450 करोड़ की लागत से स्टेशन का सौंदर्यीकरण और फेसिलिटी के काम किए जाएंगे।
Published on:
18 Nov 2022 07:05 pm
