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इंदौर की बुजुर्ग ने श्रीराम नाम से भरीं दर्जनभर कॉपियां, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान

एक भक्त ऐसी भी : श्रीराम के भव्य मंदिर के निर्माण की मनोकामना लेकर पिछले पांच साल से 77 वर्षीय मनोरमा बिना चश्मा लगाए लिख रहीं राम नाम

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धीरेंद्र गुप्ता. अयोध्या में 22 जनवरी को श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होगी। इससे पूरा देश उत्साहित है। भव्य मंदिर के लिए कोई आभूषण तो कोई चांदी के दीपक भेंट कर रहा है। सभी भक्त अपने तरीके से प्रभु की आराधना में लीन हैं। इंदौर की एक ऐसी बुजुर्ग महिला भक्त हैं, जो अयोध्या में भगवान श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण की मनोकामना लिए पिछले पांच साल से पन्नों पर राम नाम लिख रही हैं। बिना चश्मा लगाए अब तक वे राम नाम से दर्जनों कॉपियां भर चुकी हैं। उन्हें पूरा विश्वास था कि जल्द ही भगवान का भव्य मंदिर बनेगा और वे परिवार के साथ श्रीराम के दर्शन कर सकेंगी। पत्रिका से चर्चा में उन्होंने राम नाम से भरी कॉपियों को अयोध्या पहुंचाने की इच्छा जताई है।

हम बात कर रहे हैं पालीवाल नगर में रहने वालीं 77 वर्षीय मनोरमा श्रीवास्तव की। मनोरमा ने बताया, पति नरेंद्र नारायण श्रीवास्तव का देहांत होने के बाद अकेली हो गई। घर में बेटे-बहू, नाती-पोतों से भरा पूरा परिवार है। मैंने भगवान से मनोकामना जताई थी कि जब तक अयोध्या में रामलला भव्य मंदिर में नहीं विराजेंगे, तब तक मैं श्रीराम का नाम लिखती रहूंगी। मुझे जब भी समय मिलता, भगवान श्रीराम का नाम लिखने लगती हूं। दिनभर उन्हीं के नाम का जाप करती हूं। पिछले 5 साल से राम का नाम लिख रही हूं। भगवान का नाम लिखते-लिखते दर्जनों कॉपियां भर गई हैं। अब मेरे श्रीराम का भव्य मंदिर तैयार हो रहा है। मुझे खुशी है भगवान ने मेरी मनोकामना पूरी की।

हर दिन तीन से चार हजार शब्द लिखने का लक्ष्य

हर दिन सुबह 6 बजे उठती हूं। पूजा पाठ करने के बाद चाय-नाश्ता करती हूं। इसके बाद बाहर लगे सोफे पर बैठकर श्रीराम का नाम लिखने लगती हूं। तीन से चार हजार शब्द लिखने का लक्ष्य रहता है, जो दिनभर में पूरा हो जाता है। सोने के पहले भी दो से चार पेज राम नाम से भरती हूं।

अयोध्या भेजने की है इच्छा

मनोरमा श्रीवास्तव ने कहा, राम नाम से लिखी हुईं इन कॉपियों को अयोध्या भेजने की इच्छा है। बेटे ने कहा है कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद इनको लेकर अयोध्या जाएंगे। उन्होंने कहा, राम का नाम लिखने से एक अलग ही सुकून मिलता है। मन को शांति मिलती है। अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण से मेरी मां बहुत खुश हैं और वे जल्द ही रामलला के दर्शन करना चाहती हैं।

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